राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि नया टैरिफ फ्रेमवर्क लागू होने के बाद ही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। सरकार ने सोमवार (16 मार्च) को बताया कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर तब ही होंगे, जब नई शुल्क संरचना को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका फिलहाल समझौते के विभिन्न पहलुओं और तकनीकी विवरणों पर चर्चा कर रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि वार्ताएं अभी जारी हैं। उन्होंने कहा, “हम इस समय अमेरिका के साथ विस्तृत विवरणों पर बातचीत कर रहे हैं। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर वास्तविक हस्ताक्षर तब होंगे, जब नई शुल्क व्यवस्था लागू हो जाएगी।”
सरकार की यह टिप्पणी देश के नवीनतम व्यापार आंकड़े जारी होने के बाद आई है। आंकड़ों के अनुसार फरवरी में भारत का माल निर्यात 0.81 प्रतिशत घटकर 36.61 अरब डॉलर रह गया। वहीं इस अवधि में आयात 24.11 प्रतिशत बढ़कर 63.71 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष इसी समय 51.33 अरब डॉलर था। इसके परिणामस्वरूप फरवरी में व्यापार घाटा बढ़कर 27.1 अरब डॉलर हो गया।
मासिक गिरावट के बावजूद अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत का निर्यात प्रदर्शन अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल-फरवरी अवधि के दौरान देश का निर्यात 1.84 प्रतिशत बढ़कर 402.93 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसी अवधि में आयात 8.53 प्रतिशत बढ़कर 713.53 अरब डॉलर हो गया, जो मजबूत घरेलू मांग और बढ़ती आयातित खेपों को दर्शाता है।
वाणिज्य सचिव ने आने वाले सप्ताहों में निर्यात के सामने संभावित चुनौतियों का भी संकेत दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण लॉजिस्टिक व्यवधान उत्पन्न हुए हैं, जिससे मार्च में निर्यात पर असर पड़ सकता है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई के बाद 28 फरवरी से बढ़े तनाव के कारण, विशेष रूप से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास प्रमुख समुद्री व्यापार मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिसका असर माल ढुलाई और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ रहा है।
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