प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कमला लैंडमार्क ग्रुप ऑफ कंपनियों के प्रमोटर्स और वरिष्ठ प्रबंधन पर ₹408 करोड़ की कथित मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है। एजेंसी का दावा है कि इस रकम को छिपाने और घुमाने के लिए 120 कंपनियों का जाल तैयार किया गया। इस मामले में मुंबई के PMLA कोर्ट ने शुक्रवार (9 अप्रैल) को ईडी द्वारा पिछले वर्ष दायर अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लिया। शिकायत में 12 आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें जितेंद्र आर जैन, जिनेंद्र आर जैन, केतन शाह, पार्वथ शेट्टी और समूह से जुड़ी अन्य कंपनियां शामिल हैं।
ईडी के मुताबिक, आरोपियों ने आपस में जुड़ी 120 कंपनियां बनाकर कथित अपराध की आय को एक से दूसरी इकाई में घुमाया। ईडी के विशेष लोक अभियोजक सुनील गोंसाल्वेस ने अदालत को बताया कि इन कंपनियों के जरिए पैसों के लेनदेन का जटिल नेटवर्क खड़ा किया गया, जिससे धन के स्रोत को छिपाया जा सके। एजेंसी का यह भी आरोप है कि जितेंद्र जैन ने इन कंपनियों के नाम पर कई बैंक खाते खोलकर कथित तौर पर धन की हेराफेरी की।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत सैकड़ों फ्लैट खरीदारों, व्यक्तिगत निवेशकों और बैंकों व एनबीएफसी जैसे संस्थागत कर्जदाताओं को रियल एस्टेट परियोजनाओं के नाम पर ठगा। ईडी ने आरोप लगाया कि फर्जी लोन एग्रीमेंट, नकली खरीद आदेश और कंसल्टेंसी समझौते तैयार किए गए, साथ ही खातों में हेरफेर कर एक कृत्रिम वित्तीय ढांचा बनाया गया ताकि पैसों के असली स्रोत को छिपाया जा सके।
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने अभियोजन शिकायत की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे केवल एजेंसी के निदेशक ही दाखिल कर सकते हैं। हालांकि, विशेष न्यायाधीश आर.बी. रोटे ने इस आपत्ति को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “प्रॉसिक्यूशन की शिकायत को देखने से, पहली नज़र में यह पता चलता है कि हर आरोपी की भूमिका का ज़िक्र किया गया है।” अदालत ने सभी आरोपियों को 2 मई तक पेश होने का निर्देश दिया है। मामले में आगे की सुनवाई और जांच जारी है।
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