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Wednesday, March 25, 2026
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मुंबई उच्च न्यायालय का सख्त आदेश: बांग्लादेशियों सहित सभी फेरी वालों का होगा सत्यापन

99,435 को व्यापार जारी रखने की अनुमति

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शहर में अवैध फेरी वालों (हॉकर्स) की बढ़ती समस्या पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुंबई उच्च न्यायालय ने सभी हॉकर्स का व्यापक सत्यापन कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस स्थिति को गंभीर रूप से चिंताजनक बताते हुए कहा कि पहचान की पुष्टि में उन लोगों को भी शामिल किया जाए, जिन पर बांग्लादेशी या अन्य गैर-भारतीय नागरिक होने का संदेह है।

न्यायमूर्ति अजेय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ ने यह आदेश स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता जमशेद मिस्त्री को अमीकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त किया है, जो इस मामले में कोर्ट की सहायता करेंगे।

अदालत ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और पुलिस को निर्देश दिया कि वे शहर में स्टॉल लगाने वाले, फेरी लगाने वाले, या इनसे जुड़े सहायकों और कर्मचारियों की पहचान का तत्काल और विस्तृत सत्यापन करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति अवैध रूप से देश में रह रहा पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए, जिसमें प्रत्यर्पण (डिपोर्टेशन) की प्रक्रिया भी शामिल हो सकती है।

कोर्ट ने पहले से पात्र घोषित 99,435 फेरी वालों को निर्धारित नियमों के तहत व्यापार जारी रखने की अनुमति दी है। वहीं, शेष 29,008 आवेदनों का सत्यापन चार महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया है। पात्र पाए जाने पर ही उन्हें तय स्थानों पर फेरी लगाने की अनुमति दी जाएगी।

अदालत ने साफ कहा कि इन दो श्रेणियों के अलावा किसी अन्य फेरी वालों को व्यापार करने की अनुमति नहीं होगी और अवैध रूप से काम कर रहे लोगों को तुरंत हटाया जाए।

हाईकोर्ट ने आदेशों के पालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने की चेतावनी दी है। साथ ही BMC को शहरभर में स्थायी, अस्थायी, मोबाइल और वाहन आधारित सभी प्रकार के स्टॉल का निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है।

अपने 56 पृष्ठों के विस्तृत आदेश में अदालत ने टिप्पणी की कि फेरी वालों से जुड़ी प्रक्रिया पैसा, ताकत और राजनीति में उलझ गई है, जिसके कारण कानून के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी हुई है। इससे जहां फेरीवालों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं आम नागरिकों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। कोर्ट ने कहा कि अनियंत्रित हॉकिंग गतिविधियों के कारण फुटपाथों और सड़कों पर अतिक्रमण बढ़ा है, जिससे नागरिकों के सुरक्षित आवागमन और व्यवस्थित जीवन के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने BMC को 20 क्षेत्रों को हॉकर्स-फ्री घोषित करने का पायलट प्रोजेक्ट लागू करने को कहा था, लेकिन न्यायाधीशों ने माना कि इसे लागू करना भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित हुआ। कई स्थानों पर कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को पुलिस सुरक्षा तक लेनी पड़ी।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में नागरिकों को हो रही दिक्कतों का भी उल्लेख किया, जिनमें फुटपाथों पर अतिक्रमण, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा पर खतरा, आपातकालीन सेवाओं में बाधा, रेलवे स्टेशनों पर भीड़भाड़, पार्किंग स्थलों का अवरुद्ध होना और सड़कों पर अत्यधिक जाम शामिल हैं।

अदालत ने कहा है की, स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 को उसके वास्तविक उद्देश्य और भावना के अनुरूप लागू किया जाना आवश्यक है, ताकि फेरीवालों के आजीविका के अधिकार और नागरिकों की सुविधा के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।

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