भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने निवेशकों को उन ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स और ज्वैलर्स से सतर्क रहने को कहा है जो ‘डिजिटल गोल्ड’ या ‘ई-गोल्ड’ के नाम पर निवेश उत्पाद बेच रहे हैं। नियामक ने स्पष्ट किया है कि ऐसे उत्पाद न तो प्रतिभूति (security) के रूप में अधिसूचित हैं और न ही कमोडिटी डेरिवेटिव की श्रेणी में आते हैं, जिसके कारण ये पूरी तरह SEBI के नियामकीय दायरे से बाहर हैं।
इस वजह से इन पर कोई सुरक्षा तंत्र या निरीक्षण व्यवस्था लागू नहीं होती, जिससे निवेशकों को काउंटरपार्टी जोखिम और संचालन संबंधी जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। SEBI ने कहा कि कई फिनटेक ऐप्स और ज्वैलर्स छोटी राशि, जैसे ₹10 या ₹100 से निवेश शुरू करने की सुविधा और त्वरित खरीद-बिक्री का विकल्प देकर ग्राहकों को यह भरोसा दिलाते हैं कि ये निवेश भी उसी तरह सुरक्षित हैं जैसा म्यूचुअल फंड या एक्सचेंज-ट्रेडेड उत्पादों में होता है, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है।
नियामक ने निवेशकों को सलाह दी है कि यदि वे सोने में निवेश करना चाहते हैं, तो वे गोल्ड ETFs, एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स, या इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसिप्ट्स (EGRs) जैसे मान्यता प्राप्त और विनियमित चैनलों का उपयोग करें, क्योंकि ये उत्पाद पंजीकृत मध्यस्थों के माध्यम से संचालित होते हैं और स्थापित सुरक्षा प्रावधानों के अन्तर्गत आते हैं। इस बीच, भारत में सोने को निवेश विकल्प के रूप में चुनने की रुचि बनी हुई है।
विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार, अक्टूबर माह में भारत के गोल्ड ETF में लगभग 850 मिलियन डॉलर का शुद्ध प्रवाह दर्ज किया गया, जिससे वर्षभर में कुल निवेश रिकॉर्ड 3.05 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया है। SEBI ने दोहराया कि सोने में निवेश करते समय सजगता आवश्यक है और बिना नियमन वाले डिजिटल गोल्ड उत्पाद निवेशकों के लिए संभावित रूप से जोखिमपूर्ण साबित हो सकते हैं।
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