भारत का पहला स्पेस-टेक यूनिकॉर्न बनने की दहलीज पर स्काईरूट

200 मिलियन डॉलर तक जुटाने की तैयारी

भारत का पहला स्पेस-टेक यूनिकॉर्न बनने की दहलीज पर स्काईरूट

Skyroot on the verge of becoming India's first space-tech unicorn

हैदराबाद स्थित स्पेस-टेक स्टार्टअप स्काईरूट एयरवेज 150 से 200 मिलियन डॉलर (करीब 1,800 करोड़ रुपये) तक की नई फंडिंग जुटाने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस फंडिंग राउंड के बाद कंपनी का मूल्यांकन लगभग 1 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे यह भारत का पहला स्पेस-टेक यूनिकॉर्न बन जाएगा।

स्काईरूट ऑन-डिमांड सैटेलाइट लॉन्च सेवाएं प्रदान करता है। प्रस्तावित निवेश कंपनी के विस्तार के अगले चरण को गति देने के लिए उपयोग किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने इस अल्पांश हिस्सेदारी बिक्री के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल को सलाहकार नियुक्त किया है।

कंपनी में पहले से वैश्विक निवेशकों GIC और Temasek की हिस्सेदारी है। 2023 के फंडिंग राउंड में इन दोनों निवेशकों ने मिलकर 27.5 मिलियन डॉलर का निवेश किया था। उस समय कंपनी का मूल्यांकन 519 मिलियन डॉलर आंका गया था, जो इससे एक वर्ष पहले के 163 मिलियन डॉलर के मूल्यांकन से चार गुना से अधिक था।

आगामी फंडिंग राउंड में कंपनी नई इक्विटी जारी करने की योजना बना रही है, जिससे मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी पर असर नहीं पड़ेगा। यदि यह फंडिंग सफल रहती है, तो स्काईरूट भारत की पहली स्पेस-टेक स्टार्टअप होगी, जो 1 अरब डॉलर के मूल्यांकन तक पहुंचेगी।

स्काईरूट की स्थापना 2018 में पूर्व इसरो वैज्ञानिक पवन कुमार चंदना और नागा भरथ डाका ने की थी। संस्थापकों के पास कंपनी में करीब 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वर्तमान में देश में 300 से अधिक स्पेस-टेक स्टार्टअप सक्रिय हैं, लेकिन अब तक कोई भी यूनिकॉर्न दर्जा हासिल नहीं कर पाया है।

भारत का एयरोस्पेस और अंतरिक्ष क्षेत्र हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है। सरकार द्वारा 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दिए जाने के बाद निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। विश्लेषकों के अनुसार, 2033 तक वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसी अवधि तक वैश्विक स्पेस इकोनॉमी के 44 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत में स्पेस और रक्षा तकनीक स्टार्टअप्स में निवेश 2021 के 76 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में 358 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। ऐसे परिदृश्य में स्काईरूट का संभावित यूनिकॉर्न दर्जा भारतीय स्पेस-टेक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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