ताइवान की प्रमुख चिप निर्माण कंपनी फॉक्सकॉन की भारतीय यूनिट ‘फॉक्सकॉन होन हाई टेक्नोलॉजी इंडिया मेगा डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ कर्नाटक के बेंगलुरु ग्रामीण ज़िले में गंभीर विवादों में घिर गई है। स्थानीय ग्राम पंचायत ने कंपनी पर स्थानीय करों का भुगतान न करने, निर्माण नियमों का उल्लंघन करने और आसपास के गांवों के युवाओं को रोजगार से वंचित करने जैसे आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर पंचायत ने सख्त रुख अपनाते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
सोमवार (2 फरवरी)को बेंगलुरु ग्रामीण ज़िले की ग्राम पंचायत ने फॉक्सकॉन को एक औपचारिक नोटिस जारी किया, जिसमें कंपनी से स्वीकृत भवन नक्शे, निर्माण लाइसेंस, निर्माण पूर्णता और अधिभोग प्रमाणपत्र, तथा सर्वे के अनुसार क्षेत्रफल से जुड़े दस्तावेज़ मांगे गए हैं। यह नोटिस डोड्डागोल्लाहल्ली और अरुवनहल्ली गांवों में स्थित फॉक्सकॉन की सुविधाओं से संबंधित है, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग 5.33 लाख वर्ग मीटर बताया गया है।
पंचायत अधिकारियों के अनुसार, इन दोनों गांवों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है और कथित तौर पर उत्पादन गतिविधियां भी शुरू हो गई हैं। इसके बावजूद, सरकारी रिकॉर्ड में संबंधित भूमि अब भी खाली प्लॉट के रूप में दर्ज है। पंचायत ने इसे वैधानिक दायित्वों का गंभीर उल्लंघन बताया है। नोटिस में कहा गया है कि यदि कंपनी सात दिनों के भीतर मांगी गई जानकारी और दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं करती है, तो उसके खिलाफ कर्नाटक ग्राम स्वराज और पंचायत राज अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
ग्राम पंचायत ने फॉक्सकॉन पर स्थानीय करों का भुगतान न करने का भी आरोप लगाया है। पंचायत अधिकारियों का कहना है कि इसी क्षेत्र में स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और कई अन्य औद्योगिक यूनिट नियमित रूप से स्थानीय निकायों को कर का भुगतान करती हैं, जबकि फॉक्सकॉन की ओर से अब तक ऐसा नहीं किया गया है।
इसके अलावा, स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के वादे पूरे नहीं किए। उनका कहना है कि कई बार पत्राचार और बैठकों के बावजूद कंपनी ने न तो जरूरी दस्तावेज़ साझा किए और न ही स्थानीय लोगों को स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए।
ग्रामीणों के अनुसार, शुरुआती दौर में स्थानीय निवासियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था, लेकिन बाद में कंपनी ने बाहर के क्षेत्रों से कर्मचारियों की भर्ती कर ली। इसे लेकर गांवों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
इस बीच, स्थानीयों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी स्थानीय रोजगार से जुड़ी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे इस सप्ताह के अंत में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि विकास परियोजनाओं का लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंचना चाहिए और नियमों का पालन सभी कंपनियों के लिए अनिवार्य है।
फिलहाल, फॉक्सकॉन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक और औद्योगिक हलकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि कंपनी पंचायत के नोटिस पर किस तरह जवाब देती है और क्या यह विवाद कानूनी और राजनीतिक स्तर पर और गहराता है।
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