ऑनलाइन मनी गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म WinZO के संस्थापक सौम्या सिंह राठौर और पावन नंदा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को बेंगलुरु स्थित ED ज़ोनल कार्यालय में की गई पूछताछ के बाद हिरासत में लिया गया। बुधवार (26 नवंबर)को उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उन्हें एक दिन की ED रिमांड पर भेजते हुए निर्देश दिया कि उन्हें गुरुवार सुबह 11:30 बजे विस्तृत बहस के लिए दोबारा पेश किया जाए।
अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई हाल ही में की गई तलाशी अभियानों के बाद हुई। ED ने दावा किया है कि WinZO ने लगभग 43 करोड़ रुपये खिलाड़ियों के खाते में लौटाने की बजाय अपने पास ‘होल्ड’ कर रखा था, जबकि भारत में रियल-मनी गेमिंग पर प्रतिबंध लगने के बाद यह राशि खिलाड़ियों को वापस की जानी चाहिए थी।
WinZO ने एक बयान में कहा, “हमारा फोकस अपने उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और भरोसेमंद अनुभव सुनिश्चित करने पर है। कंपनी सभी कानूनों का पालन करती है।”
ED ने इससे पहले विन्ज़ो और Gamezkraft सहित कई ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के ठिकानों पर मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA), 2002 के तहत छापेमारी की थी। ये छापे बेंगलुरु और गुड़गाँव के कई स्थानों पर मारे गए।जिन परिसरों पर कार्रवाई हुई, उनमें निर्देसा नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड (NNPL) और गेम्सक्रॉफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड (GTPL) के दफ़्तर एवं कंपनी अधिकारियों के आवास शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि इन कंपनियों और उनके निदेशकों पर बड़े पैमाने पर वित्तीय धांधली, प्रभावित (manipulated) गेम परिणाम, और अन्य गंभीर आरोपों की जांच की जा रही है। छापेमारी के दौरान ED ने आठ बैंक खातों को भी सीज़ किया जिनमें 18.57 करोड़ रुपये जमा थे। यह कार्रवाई 18 नवंबर से 22 नवंबर के बीच चलाई गई।एक अधिकारी ने बताया, “तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक डिजिटल उपकरण मोबाइल फोन, लैपटॉप जब्त किए गए हैं। Gameskraft Technologies Pvt Ltd से भारी मात्रा में डेटा बैकअप भी लिया गया है।”
ED का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा रियल-मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी WinZO और संबंधित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स ने अपने एस्क्रो खातों में 30 करोड़ रुपये से अधिक राशि रोके रखी है, जिसे खिलाड़ियों को रिफंड नहीं किया गया।
गुरुवार की सुनवाई में ED की विस्तृत रिमांड याचिका पर बहस होगी। राठौर और नंदा की भूमिका, फंड प्रवाह और कथित लेनदेन की तह तक जाने के लिए एजेंसी आगे की हिरासत माँग सकती है। यह मामला भारत में ऑनलाइन गेमिंग रेगुलेशन और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े व्यापक मुद्दों को एक बार फिर सामने ला रहा है।
यह भी पढ़ें:
सन्देशखाली: यौन शोषण मामले के आरोपी TMC नेता शहजाहान शेख का फरार सहयोगी गिरफ्तार
क्या आधार कार्ड वाले विदेशी वोट डाल सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट में बहस
साइबर धोखाधड़ी: भोपाल में वकील ने ‘आतंकी फंडिंग’ में नाम की धमकी सुनकर की आत्महत्या !



