दिल्ली के लाल किला धमाके के बाद हरियाणा की अल-फलाह यूनिवर्सिटी लगातार विवादों में घिरती जा रही है। अब इस संस्था की वेबसाइट बंद कर दी गई है, जबकि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने इसे फर्जी प्रत्यायन (accreditation) दिखाने के लिए शो-कॉज नोटिस जारी किया है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इसके फंडिंग स्रोतों और आर्थिक लेन-देन की जांच शुरू करने की तैयारी कर ली है।
फरीदाबाद के धौज गांव स्थित इस निजी यूनिवर्सिटी का नाम तब सुर्खियों में आया जब वहीं के कर्मचारी लाल किला कार ब्लास्ट करने में शामिल थें। जांच में खुलासा हुआ कि डॉ. उमर के साथ डॉ. मुझम्मिल शकील और डॉ. शाहीन शाहिद भी इसी यूनिवर्सिटी से जुड़े थे। एजेंसियों ने इन्हें जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से प्रेरित “व्हाइट-कॉलर टेरर नेटवर्क” का हिस्सा बताया है, जिसमें पेशेवर डॉक्टर, लेक्चरर और शोधकर्ता शामिल थे।
शिक्षा मंत्रालय के अधीन स्वायत्त संस्था NAAC ने गुरुवार (13 नवंबर)को अल-फलाह यूनिवर्सिटी को नोटिस भेजते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने अपनी वेबसाइट पर जो ‘Grade A’ प्रत्यायन का दावा किया है, वह पूर्णतः गलत और जनता को भ्रमित करने वाला है। NAAC ने अपने पत्र में कहा, “अल-फलाह यूनिवर्सिटी का प्रत्यायन 2018 में समाप्त हो गया था, फिर भी संस्थान गलत तरीके से इसे सक्रिय दिखा रहा है। यह एक गंभीर उल्लंघन है।” NAAC ने विश्वविद्यालय प्रशासन से 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा है कि क्यों उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई न की जाए।

अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी का ‘Grade A’ प्रत्यायन 2018 में समाप्त हुआ था, जबकि अल-फलाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग का प्रत्यायन 2016 तक ही वैध था।
इसी बीच, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने भी कहा है कि जांच के बाद विश्वविद्यालय के खिलाफ “उचित कार्रवाई” की जाएगी। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब विश्वविद्यालय की वित्तीय गतिविधियों, विदेशी फंडिंग और लेनदेन की गहन जांच करेगा। यह जांच उन डॉक्टरों और कर्मचारियों तक भी पहुंचेगी जिनके नाम दिल्ली ब्लास्ट केस में सामने आए हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ED ने विश्वविद्यालय के खातों, दानदाताओं और उसके अल-फलाह ग्रुप ऑफ कंपनियों से जुड़े वित्तीय प्रवाह (financial trails) को खंगालना शुरू कर दिया है। गुरुवार दोपहर को अल-फलाह यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट अचानक ऑफलाइन हो गई। यूआरएल खोलने पर “Site Under Maintenance” संदेश प्रदर्शित हो रहा है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
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