जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के दुर्गम और घने वन क्षेत्र में रविवार (18 जनवरी)को आतंकियों के साथ हुई भीषण मुठभेड़ में भारतीय सेना के आठ जवान घायल हो गए। यह मुठभेड़ दोपहर के समय चतरू के उत्तर-पूर्व में स्थित सोंनार इलाके में उस वक्त शुरू हुई, जब सुरक्षा बल जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ संयुक्त तलाशी अभियान चला रहे थे।
अधिकारियों के अनुसार, दल का सामना दो से तीन पाकिस्तान पोषित आतंकियों से हुआ, जो आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े है। सुरक्षा बलों को देखते ही आतंकियों ने घेरा तोड़ने के इरादे से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी और ग्रेनेड भी फेंके। इसके जवाब में जवानों ने भी मोर्चा संभालते हुए कड़ा प्रतिउत्तर दिया।
मुठभेड़ कई घंटों तक चली और रुक-रुक कर गोलीबारी शाम करीब 5:40 बजे तक जारी रही, जिसके बाद इलाके में अस्थायी शांति देखी गई। हालांकि, सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को घेरकर सर्च ऑपरेशन जारी रखा है। स्थिति को देखते हुए सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और स्थानीय पुलिस से अतिरिक्त बल मौके पर भेजे गए ताकि आतंकियों को घेराबंदी से बाहर निकलने का कोई मौका न मिले।
सेना की जम्मू स्थित व्हाइट नाइट कोर ने इस अभियान को ‘ऑपरेशन त्राशी-I’ नाम दिया है। सेना ने बताया कि नागरिक प्रशासन और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय में कार्रवाई की जा रही है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच जवानों ने पेशेवर कौशल और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया।
मुठभेड़ के दौरान घायल हुए आठों जवानों को मुख्य रूप से ग्रेनेड के छर्रों से चोटें आई हैं। सभी को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है और उनकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है।
आतंकियों की तलाश तेज करने के लिए सुरक्षा बलों ने अत्याधुनिक निगरानी साधनों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। ड्रोन, स्निफर डॉग्स और अतिरिक्त सर्च टीमें इलाके में तैनात की गई हैं। यह इस वर्ष जम्मू क्षेत्र में तीसरी बड़ी मुठभेड़ है। इससे पहले 7 और 13 जनवरी को कठुआ जिले के बिलावर क्षेत्र के काहोग और नजोटे जंगलों में भी आतंकियों से झड़पें हुई थीं।
यह घटना दिसंबर 2025 में जम्मू के वन क्षेत्रों में शुरू किए गए बड़े आतंकवाद-रोधी अभियान की कड़ी मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य जंगलों में छिपे करीब तीन दर्जन आतंकियों का सफाया करना है। बीते वर्ष 15 दिसंबर को उधमपुर के मजालता क्षेत्र के सोंआन गांव में एक मुठभेड़ के दौरान एक पुलिस अधिकारी की जान भी चली गई थी, जबकि आतंकी घने जंगल और अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे थे।
गणतंत्र दिवस समारोहों से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता और बढ़ा दी है। खुफिया सूचनाओं के अनुसार, पाकिस्तान स्थित हैंडलर अधिक आतंकियों की घुसपैठ कराने की हताश कोशिशें कर रहे हैं। सुरक्षा बलों का कहना है कि क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सीमा-पार आतंकवाद को नाकाम करने के लिए अभियान पूरी ताकत से जारी रहेगा।
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