उत्तर प्रदेश के बरेली में शुक्रवार (26 सितंबर) की नमाज़ के बाद ‘आई लव मोहम्मद’ पोस्टर विवाद को लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाज़ी करते हुए इस्लामिया ग्राउंड में प्रवेश की कोशिश की और पुलिस पर पत्थरबाजी भी की। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। मौके पर पीएसी और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई।
सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे सरकार को ज्ञापन सौंपना चाहते हैं। इस बीच, सोशल मीडिया पर लाठीचार्ज के वीडियो सामने आए हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों को भागते और जमीन पर गिरते देखा जा सकता है।
यह विरोध इस्लामी धर्मगुरु मौलाना तौकीर रज़ा के आह्वान पर आयोजित किया गया था। उन्होंने इस्लामिया ग्राउंड में धरना देने की घोषणा की थी। उनका आरोप था कि देश के कई हिस्सों, जिनमें शाहजहांपुर भी शामिल है, पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं।
स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासन ने फ्लैग मार्च किया। जिलाधिकारी अभिनव सिंह ने क्षेत्र में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 लागू कर दी, जिसके तहत बिना अनुमति किसी भी तरह के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है।
आईजी अजय साहनी ने कहा, “हम सभी सड़क पर हैं। पूरी शांति है। किसी तरह की अव्यवस्था नहीं है… जब फोर्स फ्लैग मार्च कर रही थी, तभी कुछ उपद्रवी नारे लगाते हुए बाहर आए। उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।”
कैसे शुरू हुआ विवाद
यह विवाद 4 सितंबर को कानपुर में बरावफात (ईद-ए-मिलाद-उन-नबी) जुलूस से शुरू हुआ था। इसमें युवकों के समूह हरे झंडों और “आई लव मोहम्मद” लिखे पोस्टरों के साथ निकले। स्थानीय लोगों का कहना था कि यह महज़ एक श्रद्धा से जुड़ा कदम था, लेकिन कुछ हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई और इसे “नयी परंपरा” बताया।
बाद में पुलिस ने बिना अनुमति लगाए गए पोस्टरों को हटाया। कई जगह भीड़ जुटी और पोस्टरों को वापस लगाने की मांग की गई। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर 10 लोगों को हिरासत में लिया।
इसके बाद यह विवाद यूपी के अन्य जिलों तक फैल गया। बरेली में दरगाह आला हज़रत के पास प्रस्तावित पोस्टर पर रोक लगाई गई तो लोगों ने धरना दिया। संभल में नगर पालिका ने इसी तरह के नारे लिखे गए ग्राफिटी को मिटा दिया, जिससे रातभर विरोध प्रदर्शन हुआ।
9 सितंबर को कानपुर पुलिस ने 24 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की, उन पर साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और जुलूस में नई परंपरा लाने का आरोप लगाया गया। बरेली की घटना के बाद प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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