सूरत में भोपाल के कुख्यात ईरानी डेरा का सरगना ‘रहमान डकैत’ गिरफ्तार

दो दशकों से फैले बहु-राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश

सूरत में भोपाल के कुख्यात ईरानी डेरा का सरगना ‘रहमान डकैत’ गिरफ्तार

Bhopal's notorious Iranian camp leader 'Rehman Dacoit' arrested in Surat

करीब दो दशकों तक पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज और कई राज्यों में खौफ का पर्याय बने अबिद अली उर्फ राजू उर्फ “रहमान डकैत” की अपराध यात्रा का अंत शुक्रवार (9 जनवरी) को हुआ। सूरत क्राइम ब्रांच ने उसे बिना एक भी गोली चलाए गुप्त अभियान में गिरफ्तार कर लिया। भोपाल के कुख्यात ईरानी डेरा से संचालित आंतर-राज्यीय अपराध सिंडिकेट का कथित मास्टरमाइंड माने जाने वाले राजू की गिरफ्तारी गुजरात के लालगेट इलाके से हुई।

पुलिस के मुताबिक, खुफिया इनपुट मिले थे कि अमन कॉलोनी स्थित ठिकाने पर हाई रिस्क छापेमारी के बाद वह भोपाल से फरार होकर सूरत में शरण लिए हुए था और एक बड़ी वारदात की तैयारी कर रहा था। इसी सूचना पर क्राइम ब्रांच ने जाल बिछाया और उसे दबोच लिया।

जांच एजेंसियों का दावा है कि राजू ईरानी कम से कम 14 राज्यों में सक्रिय गिरोहों का संचालन करता था। उस पर लूट, धोखाधड़ी, जबरन वसूली, पहचान बदलकर अपराध, आगजनी और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप हैं। महाराष्ट्र में उस पर मकोका (MCOCA) जैसी सख्त धाराओं के तहत भी मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, वह अक्सर नकली सीबीआई अधिकारी, खाकी वर्दीधारी पुलिसकर्मी या साधु का भेष धारण कर अपराध करता था। इसी भेष बदलने की क्षमता को गिरोह की सबसे खतरनाक विशेषता माना जा रहा है, जिसके जरिए ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में बुजुर्गों और आम नागरिकों को निशाना बनाया जाता था।

पुलिस बताती है कि गिरोह का तरीका फिल्म स्पेशल 26 की तरह था। सेल्स टैक्स, कस्टम्स, सीबीआई या पुलिस अधिकारी बनकर फर्जी छापे और ठगी करना इनका काम करने का तरीका था। हर वारदात पहले से योजनाबद्ध होती थी, रास्ते और फरार होने के तरीके तय रहते थे और गिरफ्तारी की स्थिति में भी गिरोह के गुर्गे नेटवर्क की जानकारी देने से इनकार करते थे।

रविवार (11 जनवरी) को निशातपुरा पुलिस राजू ईरानी को प्रोडक्शन वारंट पर भोपाल लाई। उसे जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से 17 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया। अदालत में पेशी के दौरान राजू ने खुद को निर्दोष बताया। उसके वकील नज़र राजा ने पुलिस की सात दिन की रिमांड की मांग को चुनौती देते हुए कहा, “ऐसी रिमांड का कोई आधार नहीं है। जिस मामले का हवाला पुलिस दे रही है, वह पहले ही निपट चुका है। महिला परिवार की सदस्य है, एक अन्य आरोपी को जमानत मिल चुकी है और सामान्यतः एक दिन की रिमांड भी नहीं दी जाती। वे केवल उसका फोन चाहते हैं। हम जमानत के लिए आवेदन करेंगे।”

पुलिस का कहना है कि राजू आदतन और अत्यंत चालाक अपराधी है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “वह लगातार बयान बदलता है, नेतृत्व से इनकार करता है और अपनी भूमिका को कम करके दिखाता है। वह कई राज्यों में हत्या के प्रयास, आगजनी, धोखाधड़ी और लूट के मामलों में वांछित है।”

जांच में सामने आया है कि भोपाल की अमन कॉलोनी स्थित ईरानी बस्ती में एक नहीं, बल्कि छह से अधिक संगठित गिरोह सक्रिय हैं, कोई नकली सोना बेचकर ठगी करता है, कोई फर्जी छापों का खेल रचता है, कोई दूसरे राज्यों में चोरी-डकैती चलाता है, कोई महंगे मोबाइल चोरी कर बेचता है और कुछ जमीन घोटालों में लिप्त हैं। पुलिस का दावा है कि सभी गिरोहों की अंतिम रिपोर्टिंग एक ही व्यक्ति राजू ईरानी को होती थी।

छापेमारी में दर्जनों मोबाइल फोन, लैपटॉप, सीपीयू और पेन ड्राइव बरामद हुए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच जारी है। इनका इस्तेमाल चोरी के फोन अनलॉक करने और डिजिटल सबूत मिटाने में होने की आशंका है। संपत्ति हेराफेरी के मामलों में उसके करीबी काला ईरानी की भूमिका भी जांच के घेरे में है, जिस पर विवादित प्लॉट बेचकर करोड़ों की संपत्ति बनाने के आरोप हैं।

ईरानी गिरोह की जड़ें 1970 के दशक तक जाती हैं। राजू का पिता हसमत ईरानी इसका सरगना हुआ करता था और 2006 में राजू ने कमान संभाली। डेरा में नेतृत्व कथित तौर पर आपराधिक “योग्यता” के आधार पर तय होता है यानी रिकॉर्ड जितना गंभीर, दावा उतना मजबूत। बस्ती की लगभग हर 70 परिवारों में किसी न किसी सदस्य का आपराधिक इतिहास बताया जाता है। सदस्य महीनों तक दिल्ली, मुंबई, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अपराध करने निकलते हैं, जबकि तयशुदा कूरियर चोरी का माल सुरक्षित वापस पहुंचाते हैं।

अब, राजू ईरानी की गिरफ्तारी के साथ पुलिस को भरोसा है कि इस आपराधिक जाल के केंद्र को पकड़ लिया गया है। कानून उसे सलाखों के पीछे टिकाए रख पाएगा या वह फिर से जमानत, खामियों और फर्जी दस्तावेजों के सहारे निकल जाएगा यह देखना बाकी है।

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