नवी मुंबई के न्हावा शेवा स्थित कंटेनर फ्रेट स्टेशन (CFS) में तैनात एक कस्टम्स सुपरीटेंडेंट के खिलाफ ₹5 लाख प्रति कंटेनर रिश्वत मांगने के आरोप में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई एक आयातक द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद की गई, जिसमें अधिकारी पर माल साफ़ किए जाने के बावजूद जानबूझकर कंटेनर रोकने और अवैध वसूली का दबाव बनाने का आरोप लगाया गया है।
CBI के अनुसार, शिकायतकर्ता घाटकोपर स्थित एक फर्म में पार्टनर है, जो विदेशी देशों से विभिन्न सामान आयात करती है। फर्म ने मलेशिया के पोर्ट कलांग से कपड़ों का एक कंसाइनमेंट मुंबई के JNPT पोर्ट पर आयात किया था। इसमें दो कंटेनरों में कुल 1,097 पैकेज शामिल थे। दस्तावेज़ों के मुताबिक माल पूरी तरह घोषित था और लागू ड्यूटी भी नियमों के अनुसार जमा की गई थी।
शिकायत के अनुसार, क्लियरिंग हाउस एजेंट (CHA) ने आयातक को बताया कि CFS में तैनात एक सुपरीटेंडेंट बार-बार रिश्वत मांग रहा है। CBI अधिकारी ने बताया,“पहले ₹9 लाख प्रति कंटेनर मांगे गए, जिसे बाद में घटाकर ₹5 लाख कर दिया गया।” हालांकि अधिकारी ने कंटेनर को आउट-ऑफ-चार्ज क्लियरेंस दे दी थी, लेकिन फिर भी माल जानबूझकर रोका गया, ताकि रिश्वत दी जाए।
शिकायत में यह भी कहा गया कि अधिकारी ने धमकी दी कि अगर रिश्वत नहीं दी गई तो वह ₹22 लाख तक की अतिरिक्त ड्यूटी और पेनल्टी लगा देगा। रिश्वत न देने के इच्छुक आयातक ने तुरंत CBI से संपर्क कर लिखित शिकायत दर्ज करवाई।
CBI ने शिकायत का सत्यापन किया, जिसमें यह पाया गया कि सुपरीटेंडेंट ने वास्तव में ₹5 लाख प्रति कंटेनर की अवैध मांग की थी। इसके बाद CBI ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 (लोकसेवक द्वारा अनुचित लाभ की मांग) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मामले में आगे तलाशी, साक्ष्य एकत्र करने और अधिकारी से पूछताछ की प्रक्रिया जारी रहेगी।
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