गुरुवार को कुर्क की गई संपत्तियां नवी मुंबई के खारघर क्षेत्र में स्थित ऑफिस यूनिट्स हैं, जिन्हें कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन से खरीदा गया बताया जा रहा है।
ईडी की यह जांच महाराष्ट्र के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। इन एफआईआर में सुरेश कुटे और अन्य के खिलाफ निवेशकों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए गए हैं।
ईडी की विस्तृत जांच में यह सामने आया कि सोसायटी के फंड का एक बड़ा हिस्सा, लगभग 2,467 करोड़ रुपए “लोन” के रूप में कुटे ग्रुप की कंपनियों को ट्रांसफर किया गया था। इस समूह का नियंत्रण सुरेश कुटे और उनकी पत्नी अर्चना कुटे के पास था।
जांच एजेंसी के अनुसार, ये लोन बिना किसी पर्याप्त दस्तावेज, कोलैटरल सिक्योरिटी या फंड के अंतिम उपयोग के प्रमाण के दिए गए थे। आगे यह भी पाया गया कि इन फंडों का उपयोग वैध व्यावसायिक गतिविधियों में करने के बजाय निजी लाभ के लिए निकासी या अन्य असंबंधित व्यावसायिक निवेशों में किया गया।
इस मामले में अब तक ईडी ने कई स्थानों पर छापेमारी की है और कई अस्थायी कुर्की आदेश जारी किए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, अब तक इस मामले में कुल लगभग 1,625.36 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त, फ्रीज या कुर्क किया जा चुका है।
2 मार्च 2026 को ईडी ने अर्चना कुटे को भी गिरफ्तार किया था। पूछताछ के बाद उन्हें 7 मार्च 2026 को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। फिलहाल इस बहुचर्चित वित्तीय घोटाले में आगे की जांच जारी है और एजेंसी अन्य संबंधित व्यक्तियों एवं संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही है।
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