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फरीदाबाद के 8 आतंकियों की थी 4 शहरों में सिलसिलेवार हमलों की साजिश, NIA जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए

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10 नवम्बर की शाम लाल किला मेट्रो स्टेशन के बाहर हुए भीषण धमाके की जांच में सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकियों की एक व्यापक साजिश का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि फरीदाबाद आतंकी मॉड्यूल से जुड़े आठ आतंकियों ने देश के चार अलग-अलग शहरों में आत्मघाती धमाकों की योजना बनाई थी। हर दो आतंकियों के समूह को एक-एक लक्ष्य शहर सौंपा गया था।

सूत्रों के अनुसार, इस मॉड्यूल का सरगना डॉ. उमर उन नबी था, जिसने 10 नवम्बर की शाम 6:52 बजे एक सफेद हुंडई i20 कार में विस्फोट किया। यह धमाका लाल किला मेट्रो स्टेशन गेट नंबर 1 के पास हुआ था, इस आत्मघाती हमले में 13 लोगों की मौत हुई है, जबकी 25 घायल हुए है।  वाहन को उमर ने 29 अक्टूबर को फरीदाबाद के एक कार डीलर से खरीदा था।

एजेंसियों ने बताया कि फरीदाबाद के इस मॉड्यूल के आठ सदस्यों को चार टीमों में बांटा गया था। प्रत्येक जोड़ी को एक विशिष्ट शहर में IED धमाका करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि i20 और लाल रंग की इकोस्पोर्ट के अलावा, दो और पुरानी गाड़ियों को भी विस्फोटक लगाने के लिए तैयार किया जा रहा था। एक जांच अधिकारी ने ANI को बताया, “दो कारों के बाद यह भी सामने आया कि दो और पुरानी गाड़ियों को विस्फोटकों से लैस करने की तैयारी चल रही थी। सभी टीमें अपने लक्ष्य शहरों की पहचान कर चुकी थीं।”

आतंकी मॉड्यूल के सदस्यों ने मिलकर लगभग ₹20 लाख नकद जुटाए थे, जो डॉ. उमर उन नबी को ऑपरेशनल खर्चों के लिए सौंपे गए। इन पैसों से उन्होंने 20 क्विंटल NPK खाद (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम मिश्रण) खरीदी थी, जिसकी कीमत करीब ₹3 लाख थी। यह सामग्री गुरुग्राम, नूह और आस-पास के इलाकों से जुटाई गई थी, जिसे बाद में IED बनाने के लिए उपयोग किया जाना था।

इसके अलावा, उमर ने सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए एक Signal App ग्रुप बनाया था, जिसमें दो से चार सदस्य शामिल थे। इसी ग्रुप के ज़रिए आतंकी गतिविधियों का समन्वय किया जा रहा था।

धमाके के दिन ही फरीदाबाद के अल-फलाह मेडिकल कॉलेज से जुड़े दो डॉक्टर, डॉ. मुजामिल शकील और डॉ. अदील अहमद रादर को 2,900 किलो विस्फोटक बरामदगी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। जांच में सामने आया कि मुअज़म्मिल, उमर का नज़दीकी सहयोगी था और दोनों मिलकर इस मॉड्यूल का संचालन करते थे।

एजेंसियों के अनुसार, डॉ. मुजामिल 2021 से 2022 के बीच कट्टरपंथी संगठन अंसार गज़वात-उल-हिंद की विचारधारा से प्रभावित हुआ था। उसकी मुलाकात एक व्यक्ति इर्फान उर्फ मौलवी के ज़रिए इस नेटवर्क से हुई थी। बताया जा रहा है कि 2023 और 2024 में बरामद हुए कई हथियार इन्हीं आतंकियों ने एक स्वतंत्र आतंकी संगठन बनाने की तैयारी के तहत खरीदे थे।

इस मामले में डॉ. शाहीन सईद को भी गिरफ्तार किया गया है, जो बड़ी मात्रा में बरामद विस्फोटकों से जुड़ी बताई जा रही हैं।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अब इस पूरे नेटवर्क के तार पाकिस्तान और तुर्की में बैठे आतंकियों से जोड़कर देख रही है। जांचकर्ता मानते हैं कि यह मॉड्यूल “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित आतंकी नेटवर्क” का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य भारत के बड़े शहरों में समन्वित आत्मघाती हमले करना था। सूत्रों के अनुसार, “दिल्ली कार ब्लास्ट कोई एकल घटना नहीं थी, बल्कि भारत के खिलाफ एक बड़े समन्वित हमले की एक कड़ी थी। समय पर कार्रवाई से कई शहरों को बचाया जा सका।”

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