प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के मामले में टेक दिग्गज गूगल और मेटा को नोटिस जारी कर 21 जुलाई को पूछताछ के लिए तलब किया है। ईडी का आरोप है कि इन कंपनियों ने सट्टेबाजी से जुड़े ऐप्स को अपने प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन और प्रमोशन के माध्यम से बढ़ावा दिया, जिससे देश में मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला कारोबार को नई गति मिली।
ईडी की जांच में सामने आया है कि ये अवैध ऐप्स खुद को ‘स्किल बेस्ड गेम्स’ बताकर सट्टेबाजी के कानूनों से बचने की कोशिश कर रहे थे। गूगल और मेटा पर आरोप है कि इन्होंने इन ऐप्स को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापन की प्रमुख जगहें दीं, जिससे इन ऐप्स को व्यापक यूजर बेस मिला और करोड़ों रुपये की अवैध कमाई हुई। यह रकम हवाला चैनलों के जरिए देश-विदेश में छुपाई और घुमाई गई।
ईडी की कार्रवाई केवल टेक कंपनियों तक सीमित नहीं है। बीते सप्ताह, एजेंसी ने तेलुगु सिनेमा की 29 मशहूर हस्तियों को भी जांच के दायरे में लिया है। अभिनेता: विजय देवरकोंडा, राणा दग्गुबाती, प्रकाश राज .अभिनेत्रियां: निधि अग्रवाल, प्रणिता सुभाष, मंचू लक्ष्मी, अनन्या नगेला. टीवी कलाकार व प्रभावशाली हस्तियां: श्रीमुखी, श्यामला, वर्षिणी सौंदर्यराजन, वसंती कृष्णन, शोभा शेट्टी, अमृता चौधरी, नयनी पावनी, नेहा पठान, पांडु, पद्मावती, हर्षा साय, बय्या सनी यादव
इन सभी पर जंगली रम्मी, A23, जीतविन, परिमैच और लोटस365 जैसे सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स के प्रचार का आरोप है। ईडी की यह जांच पब्लिक गैम्बलिंग एक्ट, 1867 और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत चल रही है। अब तक की जांच में पता चला है कि इन ऐप्स के जरिए एक बड़ी फाइनेंशियल नेटवर्किंग बनाई गई थी, जिसमें विदेशों से फंडिंग, फर्जी कंपनियों का सहारा और बॉलीवुड और टॉलीवुड सेलिब्रिटीज का इस्तेमाल कर प्रमोशन किया गया।
मार्च में, साइबराबाद पुलिस ने भी कई मशहूर हस्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। हालांकि, कई हस्तियों ने सफाई दी है कि उन्होंने किसी गैरकानूनी ऐप का प्रचार नहीं किया।
प्रवर्तन निदेशालय ने साफ कर दिया है कि चाहे वह तकनीकी कंपनियां हों, फिल्मी सितारे हों या सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर — यदि कोई भी अवैध सट्टेबाजी से जुड़े मामलों में दोषी पाया गया, तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।गूगल और मेटा से 21 जुलाई की पूछताछ में यह स्पष्ट होगा कि इन कंपनियों ने कितनी जानकारी के साथ इन ऐप्स को प्रमोट किया और क्या कोई मालिकाना या राजस्व साझेदारी भी इनकी भूमिका में शामिल थी।
यह मामला भारत में ऑनलाइन सट्टेबाजी के बढ़ते खतरे, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट की वैधानिकता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। आने वाले दिनों में इस केस की दिशा और भी अहम मोड़ ले सकती है।
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