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Monday, March 9, 2026
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“अरे हरामी मीना, तुम साले आदिवासी जंगली हो, मुसलमानों के इदारे में रहकर…” : प्रोफेसर रियाजुद्दीन का दलित पर हमला

जामिया मिलिया में दलित व्यक्ती की प्रताड़ना

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जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के पॉलिटेक्निक विभाग के अप्पर डिवीजन पद पर कार्यकर्त आदिवासी व्यक्ति पर पॉलिटेक्निकल इंजीनियरिंग विभाग असोसिएट के असोसिएट प्रोफेसर रियाजुद्दीन द्वारा कथित जातिवाचक अपशब्द बोलकर हमला करने की सनसनीखेज घटना सामने आई है। दलित क्लर्क के अनुसार, प्रोफ़ेसर ने उसे जातिवाचक अपमानस्पद शब्दों में कहा, “अरे ओ हरामी मीना, तुम्हारी औकात कैसे हुई तुमने मेरे ख़िलाफ़ शिकायत की? तुम साले आदिवासी जंगली हो, मुसलमानों के इदारे में रहकर मेरे खिलाफ शिकायत करने की जुर्रत कैसे की?”

दरअसल जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के पॉलिटेक्निक विभाग के अप्पर डिवीजन पद पर काम करने वाले राम फूल मीनाके अनुसार यह कोई अलग-थलग घटना नहीं थी। विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ दुर्व्यवहार को लेकर प्रोफेसर रियाजुद्दीन के खिलाफ पहले ही रजिस्ट्रार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें पीड़ित राम फूल मीना का कोई हाथ नहीं था। हालांकि उस शिकायत से सम्बंधित वीडिओ वायरल हुआ, जिसके बाद मामला और बढ़ा और मीना को निशाना बनाया गया। राम मीना का आरोप है की इस घटना के बाद उन्हें मौखिक रूप से अपमानित किया गया, जातिगत आधार पर उनका अपमान किया गया, उन पर शारीरिक हमला भी हुआ। अंत में उनका विभाग से तबादला करवाया गया।

शिकायत के अनुसार, पहले 13 जनवरी की दोपहर करीब 3:00 बजे प्रोफेसर रियाजुद्दीन बिना किसी उकसावे के पॉलिटेक्निक विभाग के कार्यालय में आए और डेस्क पर काम करते राम फूल मिना से कहा, “अरे ओ मीना कमीना हिंदू मुस्लिम करता है।” और “मीना तू बदमाश है।” इस भाषा पर आपत्ति जताने के बाद प्रोफेसर रियाजुद्दीन आक्रामक हो गए और पीड़ित की माँ-बहन पर अभद्र गलियां दी।

 

घटना से विचलित पीड़ित ने उसी दिन जामिया मिलिया के रजिस्ट्रार को लिखीत रूप में शिकायत दी, जिसकी प्रतियां पुलिस को दी शिकायत के साथ संलग्न है। हालांकि विश्वविद्यालय के पास शिकायत देने के बावजूद दो दिनों तक प्रोफेसर पर कोई करवाई नहीं की, बल्की उस शिकायत को प्रोफेसर रियाजुद्दीन तक पहुंचाया गया, जिससे मामला और भी गरमाया।

16 जनवरी को प्रोफेसर रियाजुद्दीन कार्यालय में लौटे और पीड़ित के साथ कथित हिंसक दुर्व्यवहार किया, प्रोफेसर ने कहा, “अरे ओ हरामी मीना, तुम्हारी औकात कैसे हुई तुमने मेरे ख़िलाफ़ शिकायत की? तुम साले आदिवासी जंगली हो, मुसलमानों के इदारे में रहकर मेरे खिलाफ शिकायत करने की जुर्रत कैसे की?” पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, डॉ. रियाजुद्दीन ने राम मिना को घुसे मारे, हमले के परिणाम में पीड़ित के होंठ से खून बहने लगा और बाएं आंख के नीचे सूजन आई।

शिकायत में मीना ने कहा है की हमलें के कारण उन्हें गंभीर मानसिक आघात, अवसाद और सामाजिक अपमान का गहरा अनुभव हुआ है। विशेष रुप से उनके कार्यस्थल पर उनके साथ हुआ यह दुर्व्यवहार उनकी जाती और आदिवासी पहचान से जुडा है।

इस हमले के बाद प्रिंसिपल के साथ दलित पीड़ित पुनः रजिस्ट्रार ऑफिस गया। तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए लिखित शिकायत दर्ज की, इस बार रजिस्ट्रार ने उन्हें आश्वासन दिया की मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। हालाँकि एक चौकाने वाले फैसले के तहत विश्विद्यालय ने प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए उसी दिन पीड़ित का तबादला किया गया। पीड़ित ने इस फैसले को प्रतिशोधात्मक, दंडात्मक और उन्हें चुप कराने के इरादे से लिया गया फैसला बताया है।

दिल्ली पुलिस को दी गई शिकायत में राम मीना ने अनुसूचित जाती-जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम १८८९ के तहत भारतीय न्ययसंहिता के प्रासंगिक प्रावधानों साथ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

राम मीना के अनुसार, उनके साथ हुआ अत्याचार केवल पुलिस में दर्ज की गई शिकायत तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय में कथित तौर पर उन पर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लगातार धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला जा रहा है। परिसर में कई लोगों ने कई बार उन्हें ‘काफिर’ कहकर पुकारा है, जो की अमानवीय और बेहद अपमानजनक तरीके से इस्तेमाल किया जाता है।

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में बार-बार जबरदस्ती, भेदभाव, हिंसा, प्रशासनिक प्रतिशोध की घटनाओ के बाद, राम फूल मीना के साथ प्रताड़ना के मामले ने विश्वविद्यालय को एक बार फिर जाँच के दायरे में ला खड़ा किया है। नीति निर्माताओं पर आलोचक सवाल उठा रहें है की विश्वविद्यालय में ऐसी गतिविधियों के बावजूद भी क्या केंद्र सरकार द्वारा उस संसथान को वित्त पोषण जारी रखना उचित है, जिस पर धार्मिक उदंडता और एकात्मता थोपने और विरोधियो के खिलाफ प्रतिशोधात्मक दंड देने के आरोप लगते रहें है?

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