महाराष्ट्र साइबर के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के कार्यालय ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(सी) व 66(डी) के तहत दर्ज किया था। जांच में पता चला कि धोखेबाजों ने फर्जी पुलिस और सीबीआई अधिकारियों का रोल प्ले करके पीड़ित को डराया-धमकाया और बार-बार पैसे ट्रांसफर करवाए।
लगातार जांच, बैंक खातों की ट्रैकिंग और अदालत के समय पर आदेशों के कारण महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने पीड़ित को यह बड़ी राहत दिलाई। अदालत के निर्देश पर फ्रीज किए गए खातों से 2 करोड़ रुपये निकालकर पीड़ित के खाते में ट्रांसफर कर दिए गए। यह कदम महाराष्ट्र साइबर की तेज वित्तीय ट्रैकिंग और बैंकों व न्यायालयों के साथ अच्छे तालमेल का नतीजा है।
इसके अलावा, जांच में कई अन्य संपत्तियों की पहचान हुई है, जिन्हें फ्रीज कर दिया गया है। इन संपत्तियों को भी आगे अदालत के आदेश से पीड़ित को लौटाया जा सकेगा। मुख्य साजिशकर्ताओं की तलाश जारी है।
महाराष्ट्र साइबर ने कहा कि वे लगातार दबाव बनाकर, राज्यों के बीच समन्वय और जनता की मदद से सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करेंगे। विभाग का फोकस साइबर अपराधियों पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ पीड़ितों को जल्द से जल्द न्याय और मुआवजा दिलाना है।



