महाराष्ट्र के मुंबई स्थित माजगांव सिविल कोर्ट में तैनात एडिशनल सेशंस जज एजाज़ुद्दीन सलाउद्दीन काज़ी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उन्हें 15 लाख रुपये की रिश्वत प्रकरण में वांछित आरोपी घोषित किया है। एजेंसी के अनुसार, जज काज़ी ने इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाई और उनका रिश्वत लेते पकड़े गए कोर्ट क्लर्क चंद्रकांत वासुदेव से संबंध था।
सोमवार (17 नवंबर) को विशेष एसीबी अदालत ने क्लर्क-कम-टाइपिस्ट चंद्रकांत वासुदेव को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई 19 नवंबर को होगी। दूसरी ओर, एसीबी ने जज की जांच के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुमति मांगी है। जज काज़ी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं।
यह मामला 9 सितंबर से शुरू हुआ, जब एक पुराने प्रॉपर्टी विवाद की सुनवाई जज काज़ी की अदालत में हुई। सुनवाई के बाद, कोर्ट क्लर्क वासुदेव ने शिकायतकर्ता के एक सहयोगी से कोर्ट वॉशरूम में मुलाकात की और संकेत देते हुए कहा कि “साहब (जज) के लिए कुछ करना पड़ेगा ताकि आदेश उनके पक्ष में आए।”
इसके बाद वासुदेव ने शिकायतकर्ता से कैफे में मिलकर कुल 25 लाख रुपये की मांग की 10 लाख अपने लिए और 15 लाख जज काज़ी के लिए। शिकायतकर्ता ने इनकार किया तो वासुदेव ने उसके सहयोगी को व्हाट्सऐप कॉल कर धमकाया कि यदि पैसे नहीं दिए तो आदेश उनके खिलाफ जाएगा। मोलभाव के बाद रकम घटाकर 15 लाख रुपये तय की गई।
शिकायतकर्ता ने तुरंत एसीबी को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद 11 नवंबर को चेंबूर के एक कैफे में जाल बिछाया गया। जैसे ही वासुदेव रिश्वत लेने पहुंचा, अधिकारीयों ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। पूछताछ में उसने बताया कि वह यह रिश्वत जज काज़ी की ओर से ले रहा था।
एसीबी के निर्देश पर, वासुदेव ने गवाहों की मौजूदगी में जज काज़ी को फोन मिलाया। कॉल पर जज ने रिश्वत की रकम पर सहमति दी और वासुदेव से कहा कि वह पैसे उनके घर ले आए। वासुदेव ने यह भी स्वीकार किया कि वह एक साल से क्लर्क के तौर पर काम कर रहा था और जज से उसका करीबी संपर्क था, जिसमें निजी मामलों को लेकर भी सहायता ली जाती थी।
एसीबी की एक टीम ने 12 नवंबर को जज के घर पहुंचकर तलाशी ली, लेकिन घर बंद मिला। एक अन्य जज और दो पंचों की मौजूदगी में हाउस सीलिंग पंचनामा तैयार किया गया। एसीबी ने इस मामले में महत्वपूर्ण सबूत जब्त किए हैं, जिनमें रिश्वत की राशि, कॉल रिकॉर्डिंग, संदेश, वीडियो फुटेज और वासुदेव का मोबाइल फोन शामिल है।
प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। जज के सहयोगियों और वकीलों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। एसीबी अब जज की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर रही है, जबकि इस घटनाक्रम ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है।
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