कन्नड़ फिल्म अभिनेता दर्शन को गुरुवार (15 अगस्त) को बेंगलुरु पुलिस ने दोबारा गिरफ्तार कर लिया, ठीक कुछ घंटों बाद जब सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा दी गई उनकी जमानत को रद्द कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट के फैसले को अतार्किक और विकृत बताते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, “हाईकोर्ट का आदेश महज एक यांत्रिक शक्ति-प्रयोग जैसा है। इस तरह जमानत देने से मुकदमे की प्रक्रिया प्रभावित होगी और गवाहों पर दबाव डाला जा सकता है।” अदालत ने न सिर्फ दर्शन की, बल्कि उनकी लिव-इन पार्टनर और अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा की जमानत भी रद्द की। पवित्रा को बेंगलुरु स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया, जहां मीडिया की मौजूदगी से वे नाराज़ नज़र आईं।
मामला 8 जून 2024 का है, जब बेंगलुरु में एक नाले से रेनुकास्वामी का क्षत-विक्षत शव मिला। रेनुकास्वामी, जो खुद को पवित्रा गौड़ा का प्रशंसक बताते थे, ने कथित रूप से उन्हें अभद्र संदेश भेजे थे। इससे नाराज़ होकर दर्शन ने अपने कुछ समर्थकों को रेनुकास्वामी का अपहरण कर “सबक सिखाने” का आदेश दिया।
पुलिस हिरासत के दौरान दर्शन ने स्वीकार किया कि उन्होंने रेनुकास्वामी को पेड़ की टहनी से पीटा, सिर, सीने और गर्दन के पास लात मारी, जिससे उसकी मौत हो गई। 3,991 पन्नों की चार्जशीट में यह भी दर्ज है कि हत्या से पहले पीड़ित को यातनाएं दी गईं।
दर्शन, पवित्रा और कई अन्य आरोपियों को 11 जून 2024 को पहली बार गिरफ्तार किया गया था। पांच महीने जेल में रहने के बाद दर्शन को 13 दिसंबर को कर्नाटक हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है। यह गिरफ्तारी कर्नाटक फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि मामला न सिर्फ हत्या बल्कि स्टारडम और शक्ति के दुरुपयोग के सवाल भी उठाता है।
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