कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के येल्लापुर कस्बे में शनिवार (3 जनवरी) को दिनदहाड़े हत्या ने इलाके में सनसनी फैला दी थी। सरकारी स्कुल में काम करने वाली हिंदू महिला- रंजीता की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, इस मामले में आरोपी की पहचान मोहम्मद रफीक के रूप में हुई है, जिसने कथित तौर पर रंजीता के गले पर वार कर उसकी हत्या करने के बाद आत्महत्या कर ली।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रंजीता एक तलाकशुदा महिला थीं और उसे एक बच्चा भी है। वह अपने माता-पिता के साथ येल्लापुर में रहती थीं और एक सरकारी स्कूल में कार्यरत थीं। आरोप है कि मोहम्मद रफीक उन्हें लंबे समय से परेशान कर रहा था और शादी के लिए दबाव बना रहा था। रंजीता द्वारा बार-बार विवाह प्रस्ताव ठुकराए जाने से आरोपी उसे परेशान किया करता था।
शनिवार (3 जनवरी) को रंजीता जब स्कूल से घर लौट रही थीं, तभी रास्ते में रफीक ने उनका सामना किया। पुलिस के अनुसार, दोनों के बीच कहासुनी हुई, जिसके बाद आरोपी ने चाकू से रंजीता की गर्दन पर वार कर दिया। हमले के बाद वह मौके से फरार हो गया। गंभीर रूप से घायल रंजीता को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना फैलते ही येल्लापुर में आक्रोश का माहौल बन गया। विश्व हिंदू परिषद (VHP) सहित हिंदू संगठनों ने रविवार (4 जनवरी) को कस्बे में बंद का आह्वान किया। संभावित अशांति को देखते हुए पुलिस ने भारी संख्या में बल तैनात किया और स्थिति पर कड़ी नजर रखी गई।
इस बीच, पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए सघन अभियान शुरू किया। रविवार (4 जनवरी) को येल्लापुर के पास एक जंगल क्षेत्र में मोहम्मद रफीक का शव फंदे से लटका मिला। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, हत्या के बाद आरोपी ने जंगल में जाकर आत्महत्या कर ली।
पुलिस ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है, जिसमें आरोपी और पीड़िता के बीच के संबंधों, पूर्व उत्पीड़न के आरोपों और घटना के क्रम की पुष्टि की जा रही है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं और किसी भी तरह की अफवाह या भड़काऊ गतिविधि पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। घटना ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और उत्पीड़न के मामलों में समय रहते हस्तक्षेप की आवश्यकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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