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Thursday, January 22, 2026
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लाल किला विस्फोट: जैश-ए-मोहम्मद मॉड्यूल के विदेशी संचालकों का खुलासा, बैंक खाते फ्रीज!

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दिल्ली के लाल क़िले के पास हुए भीषण कार विस्फोट की जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ जाँच एजेंसियों को एक व्यापक और खतरनाक आतंकी नेटवर्क का पता चला है, जो अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में बैठे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े विदेशी हैंडलरों को भारत में सक्रिय स्थानीय मॉड्यूल से जोड़ता है। इस धमाके में लगभग 15 लोगों की मौत हुई थी और कई घायल हुए थे।

रिपोर्ट के अनुसार, जांचकर्ताओं ने एक ऐसा नेटवर्क उजागर किया है जिसमें फ़ैसल इशफ़ाक़ भट, हाशिम और डॉ. उक़ाशा जैसे विदेशी हैंडलर शामिल हैं। ये लोग अफ़ग़ानिस्तान और PoK से भारतीय ऑपरेटिव्स को निर्देश दे रहे थे। जांच एजेंसियों ने दो लाख रुपये से अधिक वाले कई बैंक खातों को फ्रीज़ कर दिया है और कॉल डिटेल रिकॉर्ड, चैट, डिजिटल ट्रेल और हवाला जैसे पैसों के रास्तों की जांच कर रही हैं।

जम्मू-कश्मीर के शोपियां के नादिगाम से 27 अक्टूबर को पकड़े गए मौलवी इरफान अहमद वगे, उर्फ इमाम इरफान, इस मॉड्यूल का अहम हिस्सा निकला। वह एक मस्जिद का इमाम है और जांच एजेंसियों का कहना है कि उसने कई युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर इस नेटवर्क में शामिल किया। पूछताछ में वगे ने स्वीकार किया कि वह विदेशी हैंडलरों से टेलीग्राम के ज़रिये संपर्क में था। उसने यह भी बताया कि उसने अंसार गजवात-उल-हिंद के एक आतंकी, चनापोरा के मुश्ताक अहमद भट से एक पिस्तौल और ग्रेनेड ख़रीदा था, जिसे बाद में वापस कर दिया।

जांचकर्ताओं का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क पहली बार 19 अक्टूबर को सक्रिय रूप में सामने आया, जब श्रीनगर के बुनपोरा, नौगाम में जैश-ए-मोहम्मद के नाम से धमकी भरे पोस्टर चिपकाए मिले। इसके अगले दिन नौगाम से यासिर-उल-अशरफ़, आरिफ़ निसार और मकसूद अहमद दार को गिरफ्तार किया गया। तीनों ने स्वीकार किया कि पोस्टर उन्होंने ही बनाए—यासिर ने टेक्स्ट लिखा, आरिफ़ ने उर्दू फ़ॉन्ट ऐप से डिज़ाइन किया और मकसूद ने घर पर प्रिंट किया। तीनों के बीच वगे सामान्य कड़ी निकला। पुलिस के अनुसार आरिफ़ एक टेलीग्राम ग्रुप से जुड़ा था जिसे पाकिस्तान में बैठे हनज़ुल्ला उर्फ़ उमर बिन ख़त्ताब नामक जैश के हैंडलर चलाते हैं।

वगे की पूछताछ ने जांच को हरियाणा के फ़रीदाबाद और यूपी के सहारनपुर तक पहुँचा दिया। उसने बताया कि वह दो साल पहले फ़रीदाबाद के एक अस्पताल में डॉ. मुझम्मिल अहमद गनाई से मिला था। गई को 29 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। उसके फ़ोन से टेलीग्राम पर जुड़े कई और नाम सामने आए मुसायब, अरशद, जुगनू, मुज्तबा और डॉ. अदील अहमद राथर, जो बाद में आतंकी मॉड्यूल में शामिल पाए गए। गनाई ने भी स्वीकार किया कि वह और उसके साथी विदेशी हैंडलर्स हाशिम, इशफ़ाक़ और उक़ाशा के संपर्क में थे और “कई चैनलों से बड़े फंड जुटाते थे।”

वगे की जानकारी के आधार पर गांदरबल के जमी़र अहमद उर्फ़ मुतलाशा को भी 27 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। वह “फ़र्ज़ंदान-ए-दारुल उलूम देवबंद” और “क़ाफ़िला-ए-ग़ुरबा” जैसे टेलीग्राम समूहों में सक्रिय था और विदेशी हैंडलरों से संपर्क में था। उसने धन, हथियारों और रसद से जुड़ी भूमिकाओं को स्वीकार किया।

डॉ.राठेर को 5 नवंबर को सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया, लेकिन मॉड्यूल का एक अहम सदस्य डॉ. उमर-उन-नबी फरार रहा। दिल्ली, फ़रीदाबाद और सहारनपुर में उसकी तलाश चलती रही लेकिन वह नहीं मिला, जब तक कि 10 नवंबर को उसने लाल क़िले के पास कार बम विस्फोट नहीं किया। धमाका उसी वाहन में हुआ जिसे नबी चला रहा था। जांच एजेंसियों ने कहा है कि नेटवर्क अभी और गहरा हो सकता है, और कई अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच जारी है।

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