दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। इस मामले में लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के इशारों पर काम करने वाले आतंकी हैंडलर शबीर अहमद लोन को गिरफ्तार किया गया है, जिसे मेट्रो पोस्टर केस का मुख्य हैंडलर बताया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, शबीर अहमद लोन एक स्लीपर सेल नेटवर्क का हिस्सा है और लंबे समय से गुप्त रूप से सक्रिय था। फिलहाल उस पर आरोप तय किया गया है कि उसने दिल्ली के कई इलाकों में भारत विरोधी और भड़काऊ पोस्टर लगवाए, जिससे माहौल बिगाड़ने और लोगों की भावनाओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
भड़काऊ पोस्टर्स का मामला इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान 8 फरवरी 2026 को सामने आया था। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन पर आपत्तिजनक पोस्टर मिलने की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद जांच में जनपथ समेत कई जगहों पर ऐसे पोस्टर मिलने की पुष्टि हुई, जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और DPDP एक्ट के तहत केस दर्ज कर स्पेशल सेल ने गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि यह एक संगठित आतंकी मॉड्यूल था, जो कई राज्यों में फैला हुआ था।
जांच के आधार पर दिल्ली पुलिस ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में छापेमारी कर कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया, जिनमें बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल हैं। ये लोग फर्जी पहचान के जरिए भारत में रह रहे थे। छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज, बैंक कार्ड और पाकिस्तान समर्थित पोस्टर बरामद किए गए। साथ ही, दिल्ली के संवेदनशील इलाकों जैसे लाल किला और धार्मिक स्थलों की रेकी के वीडियो भी मिले हैं।
शबीर लोन की भूमिका:
पुलिस के मुताबिक, शबीर अहमद लोन इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक था और विदेश से मॉड्यूल को निर्देश दे रहा था। उस पर आरोप है कि उसने युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेला, उन्हें भर्ती किया और पोस्टर लगाने से लेकर संवेदनशील स्थानों की निगरानी तक के निर्देश दिए।
सूत्रों के अनुसार, लोन का आतंकी गतिविधियों से पुराना संबंध रहा है। उसे 2007 में हथियार और विस्फोटक मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में रिहा होने के बाद वह फरार हो गया और विदेश चला गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि उसने आतंकी प्रशिक्षण लिया था और Lashkar-e-Taiba के शीर्ष संचालकों के संपर्क में था।
एजेंसियों को शक है कि यह मॉड्यूल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के समर्थन से संचालित हो रहा था। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही हैं और आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
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