उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार ने नोएडा में दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई एक ऐसे मामले में लापरवाही के चलते की गई, जिसमें आरोपी मुहम्मद रमीज़ पर एससी/एसटी एक्ट और उत्तर प्रदेश के एंटी-कन्वर्ज़न कानून की धाराएं नहीं लगाई गई थीं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी ने सोशल मीडिया पर खुद को ‘विकास’ बताकर एक दलित हिंदू महिला को करीब 2 वर्षों तक प्रेम संबंध में फंसाए रखा। शादी का झांसा देकर उसने पीड़िता के साथ अंतरंग वीडियो बनाए, जिन्हें बाद में ब्लैकमेलिंग के लिए इस्तेमाल किया गया। इसके बाद वह महिला के पैसे और गहने लेकर फरार हो गया।
पीड़िता ने कई बार नॉएडा के फेज-3 थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उसे बार-बार वापस लौटा दिया गया। आखिरकार मजबूर होकर उसने बजरंग दल की स्थानीय शाखा से मदद मांगी, जिसके बाद 17 मार्च को थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन किया गया।
विरोध के बाद उसी दिन आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69, 351 और 308 के तहत मामला दर्ज किया गया। 19 मार्च को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
इसके बाद मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की गई, जिसमें यह पाया गया कि उत्तर प्रदेश के एंटी-कन्वर्ज़न कानून और एससी/एसटी एक्ट की संबंधित धाराएं नहीं जोड़ी गई थीं। इस लापरवाही पर कार्रवाई करते हुए दो पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मीडिया को बताया, “इन प्रासंगिक धाराओं को शामिल नहीं करने के कारण डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी से स्पष्टीकरण मांगा गया है और एसीपी-1 सेंट्रल नोएडा उमेश यादव के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू की गई है।” उन्होंने आगे कहा, “फेज-3 थाना प्रभारी पुनीत कुमार और जांच अधिकारी (सब-इंस्पेक्टर) प्रीति गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।”
मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, हालांकि राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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