देश के सबसे खतरनाक और मोस्ट-वॉन्टेड नक्सल कमांडरों में शामिल माडवी हिडमा मंगलवार सुबह (18 नवंबर) आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीतारामराजू ज़िले के मारेडुमिल्ली जंगलों में एक बड़ी मुठभेड़ में मारा गया। 51 वर्षीय हिडमा अपनी पत्नी मदकम राजे और चार अन्य नक्सलियों के साथ ढेर हुआ। यह कार्रवाई सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि हिडमा वर्षों से सुरक्षा बलों का सबसे चुनौतीपूर्ण लक्ष्य था।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, हिडमा का दल छत्तीसगढ़ से भागने की कोशिश कर रहा था, तभी सुबह 6 बजे से 7 बजे के बीच उन्हें घेर लिया गया। हाल के हफ्तों में आंध्र प्रदेश–छत्तीसगढ़–ओडिशा बॉर्डर पर नक्सली मूवमेंट के इनपुट मिल रहे थे, जिसके आधार पर anti-Naxal Greyhounds, आंध्र पुलिस और स्थानीय बलों ने संयुक्त अभियान चलाया।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया था कि हिडमा “पार्टी का सबसे जानलेवा कमांडर” था।
हिडमा का जन्म छत्तीसगढ़ के दक्षिण सुकमा के पुरवती गांव में हुआ। दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद वह माओवादी संगठन में शामिल हो गया और अपनी सैन्य रणनीति एवं गुरिल्ला युद्ध तकनीकों के कारण तेजी से ऊपर उठता गया। संगठन में वह हिडमालू या संतोष नाम से जाना जाता था। समय के साथ वह बस्तर क्षेत्र में माओवादियों का सबसे प्रभावी और हिंसक चेहरा बन गया।
हिडमा ने People’s Liberation Guerrilla Army (PLGA) Battalion No. 1 की कमान संभाली हुई थी। यह माओवादियों की सबसे खतरनाक स्ट्राइक यूनिट मानी जाती है। वह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सक्रिय सदस्य भी था और सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर में बड़े ऑपरेशन चलाता था। बाद में वह CPI (Maoist) की सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा सदस्य बना।
हिडमा पर 1 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम था और वह NIA की मोस्ट-वॉन्टेड सूची में शामिल था। वह कई बड़े हमलों से जुड़ा रहा, 2010 दंतेवाड़ा हमला, 2013 दरभा घाटी (झीरम घाटी) हत्याकांड, 2017 और 2021 के सुकमा-बीजापुर एम्बुश, कई अन्य घातक घात लगाकर किए गए हमले, जिनमें 70 से अधिक सुरक्षाकर्मी वीरगती को प्राप्त हुए।
2016 में उसे एक मामूली सदस्य के तौर पर पकड़ भी लिया गया था, लेकिन पहचान न होने से बाद में रिहा कर दिया गया और वह फिर संगठन में और ऊपर पहुंच गया। 2021 में सुरक्षा बलों ने करीब 2,000 जवानों को लगाकर उसे पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन उल्टा सुरक्षाबलों पर ही भीषण हमला हुआ जिसमें 23 कर्मी वीरगती को प्राप्त हुए।
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने के संकल्प के बाद सुरक्षा अभियान और तेज हुए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि हिडमा की मौत बस्तर और दंडकारण्य क्षेत्रों में माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा रणनीतिक नुकसान है। सुरक्षा बलों को उम्मीद है कि हिडमा के मारे जाने से नक्सल कमान और ऑपरेशनल क्षमता दोनों पर गंभीर असर पड़ेगा।
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