उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर जिले में जिम नेटवर्क के जरिए चल रहे धर्मांतरण और उगाही रैकेट का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में एक सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) के कांस्टेबल सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो आरोपी फरार हैं। कार्रवाई एक महिला द्वारा 1090 महिला हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गई शिकायत के बाद शुरू हुई।
मिर्ज़ापुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सोमेन वर्मा ने बताया कि मामले में डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों ने पूरी साजिश को उजागर किया। जांच के दौरान मुख्य आरोपी मोहम्मद शेख अली के मोबाइल फोन से एक पासवर्ड-सुरक्षित फोल्डर बरामद किया गया, जिसमें 50 से अधिक महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो मिले। एसएसपी के अनुसार, यही डिजिटल सबूत इस मामले में निर्णायक साबित हुआ, क्योंकि शुरुआती स्तर पर ठोस साक्ष्य सीमित थे।
सोमेन वर्मा ने कहा, “उस फोल्डर ने कई महिलाओं को अलग-अलग आरोपियों से जोड़ा, जो कई जिमों से जुड़े हुए थे। उसी समय पूरा नेटवर्क सामने आ गया।”
पुलिस के अनुसार, मोहम्मद शेख अली से पहले पूछताछ की गई, जिसमें उसने सभी आरोपों से इनकार किया। हालांकि, फॉरेंसिक जांच में उसके फोन से आउटिंग, यात्रा और विवाह समारोहों की तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिनके आधार पर उसे KGN 1, KGN 2.0, KGN 3, आयरन फायर और फिटनेस क्लब जैसे जिम नेटवर्क से जुड़े एक बड़े समूह का हिस्सा बताया जा रहा है।
इसके बाद मिर्ज़ापुर के विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार लोगों में GRP का कांस्टेबल शादाब भी शामिल है, जिसे एक मुठभेड़ के बाद हिरासत में लिया गया। वहीं, इमरान और लकी नाम के दो अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए लुकआउट नोटिस जारी कर दिए हैं और सूचना देने वालों के लिए इनाम की घोषणा की गई है।
पुलिस का आरोप है कि यह गिरोह संपन्न परिवारों की महिलाओं को निशाना बनाता था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “एक सदस्य जिम में महिला से संपर्क करता था। अगर वह असफल रहता, तो दूसरा व्यक्ति कोशिश करता था।” जांच में सामने आया है कि गिरोह एक लेयर्ड सिस्टम के तहत काम करता था, जिसमें एक जिम में बात न बनने पर महिला को दूसरे जिम में भेज दिया जाता था।
आरोप है कि महिलाओं को मुफ्त जिम ट्रेनिंग का लालच दिया जाता था। ट्रेनिंग के दौरान उनकी तस्वीरें ली जाती थीं और बाद में संपर्क बढ़ाने के लिए उनका इस्तेमाल किया जाता था। एक अधिकारी के मुताबिक, “बातचीत पहले फिटनेस से शुरू होती थी, फिर निजी विषयों और उसके बाद आउटिंग तक पहुंच जाती थी।”
पुलिस का दावा है कि महिलाओं को बाजारों, मंदिरों, दरगाहों और अन्य स्थानों पर ले जाया जाता था। कुछ मामलों में उन्हें बुर्का पहनने के लिए कहा गया और धीरे-धीरे इस्लाम की ओर प्रभावित किया गया। आरोप है कि यौन उत्पीड़न के बाद आपत्तिजनक तस्वीरें रखकर उनसे पैसे मांगे जाते थे। अधिकारी के अनुसार, “अगर पैसे देने से इनकार किया जाता था, तो धर्मांतरण का दबाव बनाया जाता था।” पुलिस का कहना है कि कुछ महिलाओं ने डर के कारण पैसे दिए, जबकि कुछ ने धर्म परिवर्तन किया।
अब तक दो महिलाओं ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है, जबकि 25 से 30 अन्य महिलाओं ने अप्रत्यक्ष रूप से पुलिस से संपर्क कर गुमनाम बयान दिए हैं। पुलिस ने आउटिंग में इस्तेमाल किए गए वाहनों को भी जब्त किया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये की उगाही की गई और पीड़ितों से कथित तौर पर 5 से 7 करोड़ रुपये लेकर नए जिम खोले गए। स्थानीय लोगों ने भी पार्टियों और मुफ्त ट्रेनिंग से युवतियों को फंसाने की बात कही है।
विश्व हिंदू परिषद के नेता रामसेवक यादव ने दावा किया, “हमने पहले भी इन गतिविधियों को लेकर चेतावनी दी थी, लेकिन तब कोई कार्रवाई नहीं हुई।” पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और वित्तीय लेनदेन तथा डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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