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मुंबई उच्च न्यायलय: बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में पहले आरोपी को मिली जमानत

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मुंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार (9 फरवरी) को पूर्व मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में एक अहम आदेश पारित करते हुए पहले आरोपी को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने पंजाब के फाजिल्का जिले के निवासी 21 वर्षीय आकाशदीप कराज सिंह को जमानत दी है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश का मामले के अन्य आरोपियों की जमानत अर्जियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

12 अक्टूबर 2024 की रात मुंबई के बांद्रा इलाके में बेटे जीशान सिद्दीकी के कार्यालय से बाहर निकलते बाबा सिद्दीकी पर तीन हमलावरों ने गोलीयां चलाई थी। इस हाई-प्रोफाइल हत्या ने राज्य की राजनीति और कानून-व्यवस्था को लेकर व्यापक चर्चा छेड़ दी थी।

हाई कोर्ट ने आकाशदीप सिंह को जमानत देते समय कई कड़े प्रतिबंध भी लगाए हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि सिंह महाराष्ट्र में ही रहेगा और हर दूसरे सोमवार को संबंधित पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगाएगा। इसके अलावा, उसे स्थानीय जमानतदार प्रस्तुत करना होगा और अपना पासपोर्ट अदालत के समक्ष जमा करना होगा। कोर्ट की अनुमति के बिना वह राज्य से बाहर नहीं जा सकेगा।

आकाशदीप सिंह को मुंबई क्राइम ब्रांच ने पंजाब एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स के साथ संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया था। वह इस मामले में गिरफ्तार होने वाला 24वां आरोपी था। अब तक इस हत्याकांड में 27 से अधिक आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि आकाशदीप सिंह ने शूटर्स और बिश्नोई गैंग से जुड़े साजिशकर्ताओं के बीच समन्वयक (कोऑर्डिनेटर) की भूमिका निभाई थी। एजेंसियों के अनुसार, वह कथित तौर पर संपर्क साधने और सूचनाओं के आदान-प्रदान करने में शामिल था।

वहीं, बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि सिंह के खिलाफ कोई ठोस और प्रत्यक्ष सबूत मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष केवल एक कॉल रिकॉर्ड पर निर्भर है, जो घटना से पहले का है और जिससे आरोपी की संलिप्तता सिद्ध नहीं होती। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अभियोजन से सिंह की कथित भूमिका को लेकर सवाल भी किए। दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने माना कि इस चरण पर जमानत देने से न तो जांच प्रभावित होगी और न ही न्यायिक प्रक्रिया में कोई बाधा आएगी।

तीन बार विधायक रह चुके बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां इस हत्याकांड के पीछे की पूरी साजिश, गैंग नेटवर्क और संभावित मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। हाई कोर्ट का यह आदेश ऐसे समय में आया है, जब मामले में कई आरोपियों की भूमिका को लेकर जांच अभी निर्णायक चरण में नहीं पहुंची है।

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