महाराष्ट्र साइबर के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को हैक करने और उसमें सेंध लगाने की एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जो साइबर क्राइम को रोकने के लिए राज्य की नोडल एजेंसी के तौर पर काम करती है। हालांकि, डिपार्टमेंट के एडवांस्ड सिक्योरिटी सिस्टम और सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (SOC) की सतर्कता की वजह से अटैक को शुरू में ही नाकाम कर दिया गया। टेक्निकल जांच के बाद, इस मामले में एक 22 साल के कॉलेज स्टूडेंट के शामिल होने का पता चला है, और पूरी पूछताछ के बाद उसे नोटिस जारी किया गया है।
15 अगस्त, 2026 को डिपार्टमेंट के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर साइबर अटैक करने और सिस्टम में गैर-कानूनी तरीके से घुसपैठ करने की कोशिश की गई थी। डिपार्टमेंट के सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (SOC) के एडवांस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम ने तुरंत इस संदिग्ध मूवमेंट का पता लगा लिया। टेक्निकल टीम ने मौके पर ही साइबर अटैक को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाए, जिससे आगे होने वाले खतरे टल गए।
अटैक को न्यूट्रलाइज़ करने के बाद, साइबर पुलिस ने केस के टेक्निकल ट्रेल को ट्रेस करना शुरू किया। इस साइबर अटैक के डिजिटल फुटप्रिंट्स और उससे जुड़े ‘IP एड्रेस’ का पूरी तरह से एनालिसिस (बैकवर्ड ट्रेसिंग) किया गया। इस जांच के बाद पता चला कि इस साइबर अटैक में एक 22 साल का कॉलेज स्टूडेंट शामिल था। महाराष्ट्र साइबर ने उस युवक को कस्टडी में लेकर उससे पूछताछ की और जांच के बाद, लीगल प्रोसेस के तहत उसे नोटिस जारी किया गया है।
स्टूडेंट्स और युवाओं को साइबर डिपार्टमेंट की चेतावनी
किसी भी सरकारी वेबसाइट, सर्वर या डिजिटल सिस्टम को बिना इजाज़त एक्सेस करना, जांच/टेस्ट करना या हैक करने की कोशिश करना कानून के तहत एक गंभीर और कॉग्निजेबल अपराध है। युवाओं और स्टूडेंट्स, खासकर जो टेक्नोलॉजी में दिलचस्पी रखते हैं, उन्हें ऐसी गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल नहीं होना चाहिए; नहीं तो, उन्हें सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, महाराष्ट्र साइबर डिपार्टमेंट ने साफ चेतावनी दी है।
यह भी पढ़ें-
यमन के प्रेसिडेंशियल पैलेस पर हूथियों का मिसाइल हमला, 2 की मौत
