पांच साल में 5,100 से ज्यादा मनी लॉन्ड्रिंग केस, 95% मामलों में सजा

संसद में मोदी सरकार ने बताया ED का प्रदर्शन

पांच साल में 5,100 से ज्यादा मनी लॉन्ड्रिंग केस, 95% मामलों में सजा

Over 5,100 money laundering cases in five years, with convictions in 95% of the cases.

केंद्र सरकार ने संसद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कामकाज को लेकर बड़ा दावा किया है। सरकार ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में मनी लॉन्ड्रिंग के जिन मामलों में योग्यता के आधार पर फैसला हुआ, उनमें लगभग 95 प्रतिशत मामलों में दोषसिद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही इस अवधि में ED ने 5,100 से अधिक मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में चार्जशीट दाखिल की है।

यह जानकारी मंगलवार (3 फरवरी ) को संसद में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन के सवाल के जवाब में दी गई। वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सदन को बताया कि प्रवर्तन निदेशालय ने वर्ष 2020–21 से दिसंबर 2025 के बीच धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत कुल 5,158 मामलों को जांच के लिए दर्ज किया। हालांकि, सरकार के पास राज्यवार आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

सरकार द्वारा पेश किए गए वर्षवार आंकड़ों के अनुसार, 2021–22 में सबसे अधिक 1,116 प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की गईं। इससे पहले 2020–21 में 996 मामले दर्ज हुए थे। 2023–24 में यह संख्या घटकर 698 रह गई, लेकिन 2024–25 में फिर बढ़कर 775 हो गई। चालू वित्त वर्ष में दिसंबर तक 620 मामलों की पुष्टि हो चुकी है।

सरकार ने यह भी बताया कि PMLA लागू होने के बाद से 31 दिसंबर तक कुल 8,391 ECIR दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें से 1,960 मामलों को विशेष PMLA अदालतों में अभियोजन शिकायतों के साथ पेश किया गया है, जिनमें दोषसिद्धि और अपराध की आय को जब्त करने की मांग की गई है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक विशेष अदालतों ने योग्यता के आधार पर 58 मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में फैसले सुनाए हैं। इनमें से 55 मामलों में दोषसिद्धि हुई है और कुल 123 आरोपियों को दोषी ठहराया गया है। इस तरह योग्यता आधारित मामलों में दोषसिद्धि की दर 94.82 प्रतिशत रही। सरकार ने बताया कि 2020–21 में 43 मामलों में सजा मिली थी, जिनमें 104 आरोपियों को PMLA के तहत दोषी पाया गया। इसके बाद समय के साथ दोषसिद्धि की संख्या में लगातार वृद्धि हुई और 2023–24 में यह अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

जांच में देरी को लेकर उठे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि ED जोखिम आकलन पर आधारित बहु-स्तरीय रणनीति अपनाता है और विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारियों के आधार पर कार्रवाई करता है। जटिल वित्तीय अपराधों की जांच को तेज और प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का अधिक उपयोग किया जा रहा है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फॉरेंसिक टूल्स, बहुराष्ट्रीय डेटाबेस और ओपन-सोर्स सूचनाओं का सहारा लिया जा रहा है, ताकि उत्पादकता बढ़े और मामलों का निपटारा तेजी से हो सके।

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