बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे ने बहुचर्चित एंटीलिया बॉम्ब केस और ठाणे के कारोबारी मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में विशेष अदालत से रिहाई की मांग की है। वाझे ने आरोप लगाया है कि अभियोजन पक्ष का मामला ठोस और स्वीकार्य साक्ष्यों के बजाय केवल आरोपों पर आधारित है।
सोमवार (9 मार्च)को वाझे ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी(NIA) की विशेष अदालत में 150 पन्नों की रिहाई पर याचिका दाखिल की। अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अभियोजन पक्ष को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च को तय की गई है।
याचिका में वाझे ने जांच की कई प्रक्रियाओं और निष्कर्षों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कथित धमकी पत्र मिलने से लेकर कारोबारी मंसुख हिरन की हत्या तक की पूरी कहानी पर संदेह जताया है।
दरअसल मुंबई के दिग्गज उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास विस्फोटकों से लदी एक स्कॉर्पियो कार बरामद हुई थी। इसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया और जांच बाद में NIA को सौंप दी गई।
वाझे ने अपनी याचिका में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा जो मकसद बताया गया है, उसके समर्थन में कोई ठोस सामग्री रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि अंबानी परिवार के किसी सदस्य को कथित धमकी से वास्तविक खतरे का डर था।
उन्होंने इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) कानून (UAPA) के प्रावधान लागू करने पर भी सवाल उठाया। याचिका में कहा गया, “इस तरह के नोट/लेटर रखने के पीछे न तो कोई मकसद बताया गया है, न ही इशारा किया गया है, न ही किसी ने इस तरह के काम की कोई ज़िम्मेदारी ली है, और न ही किसी ने इस तरह के काम का कोई फ़ॉलो-अप किया है। तो कुल मिलाकर यह आसानी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह एक धोखा या शरारत है और निश्चित रूप से UAPA के तहत कोई आतंकवादी गतिविधि नहीं है।”
वाझे ने यह भी तर्क दिया कि जांच को NIA को सौंपे जाने का आधार भी स्पष्ट नहीं है। उनके अनुसार पूरे मामले में कई प्रक्रियात्मक और तथ्यात्मक खामियां हैं, जिनके कारण आरोपों को बनाए रखना उचित नहीं है।
अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष अपना जवाब अदालत में दाखिल करेगा, जिसके बाद अदालत यह तय करेगी कि वाझे की डिस्चार्ज याचिका पर आगे क्या कार्रवाई की जाए। यह मामला पहले से ही देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक रहा है और इसकी कानूनी प्रक्रिया पर व्यापक नजर बनी हुई है।
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