महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) कार्यालय से जुड़े BPO में कथित यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव मामले में मुख्य आरोपी निदा खान को पुलिस ने 42 दिनों बाद गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार, खान को छत्रपति संभाजीनगर से पकड़ा गया, जहां वह लंबे समय से फरार चल रही थी। पुलिस अब उसे नासिक लाकर स्थानीय अदालत में पेश करेगी।
निदा खान के खिलाफ देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में अपराध क्रमांक 156/26 के तहत मामला दर्ज है। इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) पिछले कई सप्ताह से उसकी तलाश कर रहा था। पुलिस अधिकारी संदीप मिटके के नेतृत्व में SIT ने मार्च 26 को FIR दर्ज होने के बाद जांच तेज कर दी थी।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह मामला केवल एक FIR तक सीमित नहीं है। SIT फिलहाल कुल नौ अलग-अलग मामलों की जांच कर रही है, जिनमें कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना, धार्मिक दबाव, जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयास और महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार जैसे आरोप शामिल हैं।
पुलिस अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें एक महिला ऑपरेशंस मैनेजर भी शामिल है। कई महिला कर्मचारियों ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि कार्यस्थल पर उन पर मानसिक और धार्मिक दबाव बनाया जाता था।
FIR के अनुसार, निदा खान पर आरोप है कि वह एक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से कर्मचारियों पर विशेष धार्मिक प्रथाओं का पालन करने के लिए दबाव डालती थी। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि महिला कर्मचारियों से नमाज पढ़ने, गैर-शाकाहारी भोजन करने और इस्लामी परंपराओं के अनुरूप कपड़े पहनने के लिए कहा जाता था।
कुछ शिकायतों में यह भी दावा किया गया है कि कर्मचारियों पर खान-पान की आदतें बदलने और धार्मिक प्रतीकों को अपनाने का दबाव डाला गया। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को शिकायतकर्ता के अनुसूचित जाति समुदाय से होने की जानकारी थी, इसके बावजूद कथित धार्मिक दबाव बनाया गया।
इसी आधार पर निदा खान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की यौन उत्पीड़न और मानहानि से जुड़ी धाराओं के अलावा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था की निदा खान के कनेक्शन मलेशिया तक बने हुए थे, जहां वह पीड़िता को भेजना चाहती थी।
इससे पहले 18 अप्रैल को निदा खान ने अपनी गर्भावस्था का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत और गिरफ्तारी से अंतरिम राहत की मांग की थी। हालांकि, नासिक की अदालत ने 2 मई को उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अब गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच और तेज होने की संभावना है।
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