त्रिपुरा के 24 वर्षीय युवक अंजेल चकमा की मौत के मामले में उत्तराखंड पुलिस ने कहा है कि उन्हें जांच के शुरुआती चरण में नस्लीय हिंसा (रेशियल वायलेंस) के कोई प्रथमदृष्टया सबूत नहीं मिले हैं। देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अजय सिंह ने मीडिया को बताया कि घटना के दिन मृतक अंजेल चकमा और उसके छोटे भाई माइकल चकमा के साथ आरोपियों का विवाद हुआ था, जो बाद में हिंसा में बदल गया। इस हिंसा में अंजेल गंभीर रूप से घायल हुआ और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
एसएसपी अजय सिंह के अनुसार, यह हिंसा कुछ शब्दों की गलत व्याख्या के कारण भड़की। उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर मौजूद कुछ लोग आपस में बहस कर रहे थे और इस दौरान कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। पुलिस के मुताबिक, किसी तरह यह धारणा बन गई कि ये टिप्पणियां अंजेल और उसके भाई के लिए कही गई हैं, जिसके बाद टकराव हो गया।
अजय सिंह ने कहा, “यह नस्लीय टिप्पणी की श्रेणी में नहीं आता, क्योंकि घटना में शामिल एक युवक उसी राज्य का निवासी है।” उन्होंने आगे कहा, “आपस में बैठे हुए एक-दूसरे के लिए आपत्तिजनक बातें कह रहे थे और किसी तरह यह गलतफहमी पैदा हो गई कि ये बातें उनकी ओर इशारा करके कही जा रही हैं। इसी भ्रम में झड़प हुई और पूरा मामला उसी से उत्पन्न हुआ।”
#Selaqui_Assault_Case:
Prima Facie No Evidence of Racial Violence — Dehradun Policehttps://t.co/ePGWuxuHc3 pic.twitter.com/BQk4yFimDB— Dehradun Police Uttarakhand (@DehradunPolice) December 29, 2025
नस्लीय हिंसा के आरोपों को खारिज करते हुए एसएसपी ने यह भी बताया कि आरोपियों में से एक स्वयं पूर्वोत्तर भारत से है। उन्होंने कहा, “वे एक-दूसरे को पहले से नहीं जानते थे। उनके बीच पहले कभी कोई विवाद या दुश्मनी नहीं थी। यह पूरी तरह से अजनबियों के बीच हुआ झगड़ा था। पूछताछ के दौरान पूर्वोत्तर से जुड़े एक युवक ने खुद स्वीकार किया कि टिप्पणियां किसी को निशाना बनाकर नहीं की गई थीं, बल्कि वे आपस में मजाक में बातें कर रहे थे।”
त्रिपुरा के निवासी और एमबीए छात्र अंजेल चकमा की 26 दिसंबर को एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। वह 9 दिसंबर को देहरादून में हुई हिंसक घटना में घायल हुआ था। यह घटना एक कैंटीन के पास हुई, जहां अंजेल अपने छोटे भाई माइकल के साथ सामान खरीदने गया था।
माइकल चकमा का आरोप है कि जब वह अपने भाई के साथ बाइक से लौट रहा था, तब कैंटीन के पास खड़े नशे में धुत कुछ लोगों ने उन्हें “चाइनीज” और “चिंकी” कहकर नस्लीय गालियां दीं। माइकल ने बाइक से उतरकर इसका विरोध किया, जिसके बाद विवाद बढ़ गया और कथित तौर पर समूह ने उस पर हमला कर दिया। माइकल को बचाने आए अंजेल पर भी हमला किया गया। आरोप है कि माइकल के सिर पर कड़ा (धातु का कंगन) मारा गया और अंजेल को चाकू घोंपा गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। अंजेल को करीब 17 दिनों तक इलाज चला, लेकिन अंततः उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने इस मामले में दो नाबालिगों सहित छह लोगों को आरोपी के रूप में चिन्हित किया है। इनमें से पांच को 14 दिसंबर को गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि छठा आरोपी नेपाल फरार हो गया। पुलिस ने फरार आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया है और उसकी तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और सभी पहलुओं की गहनता से पड़ताल की जा रही है।
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