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वरणासी: अदालत का मात्र 11 महीनें में फैसला, नाबालिग का रेप करने वाले इरशाद को फांसी की सजा

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आठ साल की बच्ची के साथ बलात्कार उसकी हत्या के मामले में मंगलवार (18 नवंबर) दोषी पाए गए मोहम्मद इरशाद वाराणसी की एक अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। मामला इसीलिए भी चर्चा में की अदालत ने मात्र 11 महीनों में पीड़िता के हित में न्याय दिया और इसी अवधि में अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई। विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार ने सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए दोषी को मौत की सज़ा के साथ 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता के पिता को मुआवजे के रूप में दी जाए। 

दरअसल यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना वरणासी के थाना रामनगर क्षेत्र की है, जब 24 दिसंबर, 2024 को नाबालिग लड़की अपने इलाके की एक दुकान पर कुछ सामान खरीदने गई थी और वापस घर नहीं लौटी। उसके परिवार ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। अगली सुबह 25 दिसंबर को स्थानीय लोगों को इलाके के एक सरकारी स्कूल में एक बोरे में बंद लड़की का शव मिला। शव पर गंभीर चोटों के निशान थे; सिर क्षत-विक्षत था और पहचान छिपाने के लिए किसी भारी पत्थर से वार किए गए थे।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मोहम्मद इरशाद लड़की खरीदे हुए सामान के साथ लौटती पीड़िता का इंतज़ार कर रहा था। बाद में, वह लड़की को जबरन एक सुनसान जगह पर ले गया और वहाँ उसके साथ बलात्कार किया। इस क्रूर अपराध के बाद, पोल खुलने के डर से उसने उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद, वह शव को स्कूल ले गया, पत्थर से उसका सिर कुचल दिया और वहीं छोड़ दिया।

पास ही के एक कैमरे में लगे सीसीटीवी फुटेज में इरशाद लड़की के साथ अपने घर में घुसता और कुछ देर बाद एक बोरा लेकर निकलता हुआ दिखाई दे रहा था। जब पुलिस ने उसके घर पर छापा मारा, तो वह भाग गया। बाद में पिछले साल 26 दिसंबर को एक पुलिस मुठभेड़ में उसे गिरफ्तार कर लिया गया, जिसमें उसने पुलिस पर गोली चलाई और उसके पैर में गोली लगी। पोस्टमॉर्टम में यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई। मुकदमे के दौरान पीड़िता के पिता, पुलिस अधिकारियों और मेडिकल परीक्षक सहित अभियोजन पक्ष के सात गवाह पेश किए गए।

अभियोजन पक्ष ने अपराध की क्रूरता को देखते हुए कड़ी से कड़ी सज़ा की पुरज़ोर पैरवी की। अदालत ने इरशाद के क्रूर स्वभाव और पीड़ित को दी गई पीड़ा की निंदा करते हुए उसे समाज के लिए ख़तरा बताया। सज़ा में मृत्युदंड और पीड़ित के परिवार को मुआवज़े के तौर पर एक बड़ा जुर्माना शामिल है।

पीड़िता के पिता ने 25 दिसंबर, 2024 को वाराणसी के रामनगर थाने में अपनी बेटी के लापता होने की प्राथमिकी दर्ज कराई। यह प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की विभिन्न धाराओं, विशेष रूप से भारतीय दंड संहिता की धारा 103(1), 238, 659(2), 137(2) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम की धारा 5(डी)/6 के तहत दर्ज करवाई गई थी।

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