वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक 27,360 करोड़ रुपए के कुल वित्तीय आवंटन के साथ यह योजना छात्रों को 21वीं सदी के कौशल से लैस करने के साथ-साथ अवसंरचना, शिक्षण शास्त्र, समावेशिता और संवहनीयता को मजबूत करती है।
भारत में स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव हो रहा है, जिसमें गुणवत्ता, समानता, समावेशिता और भविष्य के लिए तैयार शिक्षण पर विशेष बल दिया जा रहा है। 14.71 लाख स्कूलों में 24.69 करोड़ से ज़्यादा छात्र पढ़ रहे हैं। ऐसे में भारत की शिक्षा व्यवस्था का ध्यान अब सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने और एक ऐसा सक्षम वातावरण तैयार करने पर केंद्रित है, जो हर छात्र के सर्वांगीण विकास में मदद करे।
इस योजना का मकसद मौजूदा स्कूलों को बेहतर बनाना और उन्हें ऐसे आदर्श संस्थानों के तौर पर विकसित करना है जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को असरदार ढंग से लागू करने का उदाहरण पेश करें। 27,360 करोड़ रुपए की कुल लागत वाली यह योजना 14,500 से ज्यादा मौजूदा स्कूलों को आदर्श संस्थानों के रूप में मजबूत करने पर केंद्रित है।
जुलाई 2026 तक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 13,092 स्कूलों को ‘पीएम श्री’ स्कूलों के तौर पर चुना गया है। इनमें केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस), नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के तहत आने वाले स्कूल भी शामिल हैं। यह तय किए गए लक्ष्य का लगभग 90 फीसदी है। इस योजना से 20 लाख से ज्यादा छात्रों को सीधे फायदा होने की उम्मीद है।
पीएम श्री योजना को 2022–23 से 2026–27 तक यानी पांच साल के लिए लागू किया जा रहा है। इस योजना की कुल लागत 27,360 करोड़ रुपए है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 18,128 करोड़ रुपए है। परियोजना अनुमोदन बोर्ड (पीएबी) द्वारा मंजूर किए गए खर्च में केंद्र का हिस्सा 2023–24 में 2,520 करोड़ रुपए से बढ़कर 2026–27 में 5,224 करोड़ रुपए हो गया है।
‘पीएम श्री’ स्कूलों को ऐसे मॉडल स्कूलों के रूप में डिजाइन किया गया है जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक अवसंरचना, समावेशी तौर-तरीकों और संवहनीय विकास के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख सिद्धांतों को दिखाते हैं।
‘पीएम श्री’ पहल ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13,092 चुने हुए स्कूलों का एक बड़ा राष्ट्रीय नेटवर्क बनाया है। इसमें केंद्रीय विद्यालय संगठन, नवोदय विद्यालय समिति और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के तहत आने वाले संस्थान भी शामिल हैं।
