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Sunday, April 12, 2026
होमदेश दुनियाअली खामेनेई के वंशज बोले, पाकिस्तान ‘अमेरिका का गुलाम’, सीजफायर सराहा!

अली खामेनेई के वंशज बोले, पाकिस्तान ‘अमेरिका का गुलाम’, सीजफायर सराहा!

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई (दिवंगत) के वंशज डॉ. रेहान काजमी ने बताया अमेरिका को हारा हुआ देश और पाकिस्तान को 'आतंक का केंद्र' बताया है।

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मिडल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच मचे घमासान और हालिया सीजफायर के बीच बाराबंकी के किंतूर गांव से एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय गूंज सुनाई दी है। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई (दिवंगत) के वंशज डॉ. रेहान काजमी ने आईएएनएस से बात करते हुए अमेरिका को हारा हुआ देश और पाकिस्तान को ‘आतंक का केंद्र’ बताया है।
उन्होंने दावा किया कि सीजफायर अमेरिका की मजबूरी है, क्योंकि वह अपने किसी भी मकसद में कामयाब नहीं हो सका। रेहान काजमी ने कहा कि किसी की जीत इस बात से तय होती है कि उसने अपना मकसद हासिल किया या नहीं। अमेरिका चाहता था कि ईरान की सत्ता में बदलाव आए और वहां के संसाधनों पर कब्जा हो, लेकिन उसे मुंह की खानी पड़ी।
डॉ. काजमी के अनुसार, ईरान ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों पर अमेरिका को झुका दिया है। गाजा, फिलिस्तीन और लेबनान के संदर्भ में ईरान की शर्तों को वाशिंगटन ने स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि अब पूरी दुनिया जानती है कि अमेरिका बुरी तरह हारा है और ईरान असली सुपर पावर बनकर उभरा है।

पाकिस्तान की भूमिका पर तीखा हमला बोलते हुए, डॉ. रेहान काजमी ने उसे अमेरिका का ‘गुलाम देश’ करार दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी मर्जी से नहीं बल्कि अमेरिका के इशारे पर बीच में आ रहा है, क्योंकि अगर अमेरिका सीधे ईरान के पास बातचीत के लिए जाता तो उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी बेइज्जती होती।

डॉ. काजमी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान, अमेरिका से पैसे लेकर अपने यहां आतंकवाद को बढ़ावा देता है और वह अमेरिका के इशारे पर काम करता है। साथ ही, पाकिस्तान अशांति फैलाता है।

डॉ. रेहान काजमी ने कहा कि पाकिस्तान इस विवाद में जबरदस्ती शामिल होकर भारत को यह दिखाना चाहता है कि वह ‘विश्व गुरु’ है, लेकिन उसकी असलियत दुनिया से छिपी नहीं है। पाकिस्तान की अपनी कोई स्वतंत्र नीति नहीं है और वह केवल अमेरिका के हितों की पूर्ति कर रहा है।

बता दें कि मिडिल ईस्ट में युद्ध को लेकर इस्लामाबाद में सीजफायर वार्ता चल रही है। इस वार्ता में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि शामिल होने के लिए आए हैं। अभी पूरी दुनिया की नजर इस वार्ता से निकलने वाले अंतिम फैसले पर टिकी हुई है, क्योंकि मिडिल ईस्ट युद्ध का असर वैश्विक स्तर पर प्रभाव दिखा है।

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