यूनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश (यूएनबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्यूआई पैमाने के अनुसार ढाका में हवा की गुणवत्ता को “बहुत खराब” माना गया। यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी है, जिससे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
मलेशिया का कुआलालंपुर 208 एक्यूआई के साथ दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि सिंगापुर 179 के एक्यूआई के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
एक्यूआई मानकों के अनुसार, 301 से ऊपर की रीडिंग को ‘खतरनाक’ माना जाता है; 201-300 के बीच की रीडिंग को ‘बहुत खराब’ माना जाता है; 151-200 के बीच की रीडिंग को ‘खराब’ की श्रेणी में रखा जाता है; जबकि 101-150 के बीच की रीडिंग को ‘संवेदनशील समूहों के लिए अस्वस्थ’ माना जाता है।
यूएनबी की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश का ढाका लंबे समय से वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है। आमतौर पर सर्दियों में हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है और मानसून के मौसम में इसमें सुधार होता है।
एक्यूआई की गणना पांच प्रमुख प्रदूषकों के आधार पर की जाती है: पार्टिकुलेट मैटर (पीएम10 और पीएम2.5), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (एनओ2), कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ), सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ2) और ओजोन।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण दुनिया भर में हर साल 70 लाख (7 मिलियन) लोगों की मौत होती है। इन मौतों का मुख्य कारण हृदय रोग, स्ट्रोक, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), फेफड़ों का कैंसर और सांस से जुड़े गंभीर संक्रमण होते हैं।
डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों से पता चलता है कि दुनिया की लगभग पूरी आबादी (99 प्रतिशत) ऐसी हवा में सांस लेती है जो डब्ल्यूएचओ द्वारा तय दिशानिर्देशों की सीमा से अधिक प्रदूषित होती है और जिसमें प्रदूषकों का स्तर बहुत अधिक होता है। कम और मध्यम आय वाले देशों के लोग इसके सबसे अधिक संपर्क में आते हैं।
स्टडी के मुताबिक, पीएम2.5 प्रदूषण के कारण ढाका, चट्टोग्राम, राजशाही, खुलना, सिलहट और बारिशाल में हर साल लगभग 88,240 लोगों की समय से पहले मौत हो जाती है — यानी हर 1,00,000 लोगों पर लगभग 260 मौतें। ‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार, स्टडी में अनुमान लगाया गया है कि पीएम2.5 प्रदूषण से बांग्लादेश को सालाना लगभग 23 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ।
इस स्टडी में जहांगीरनगर यूनिवर्सिटी के पब्लिक हेल्थ और इंफॉर्मेटिक्स डिपार्टमेंट के तहत ‘क्लाइमेट चेंज, एयर क्वालिटी एंड हेल्थ रिसर्च (सी2एएचआर) यूनिट’ द्वारा 2013 से 2021 तक के डेटा का विश्लेषण किया गया।
