ऊंटों की सौंदर्य प्रतियोगिता से 20 ऊंट अयोग्य घोषित

बोटॉक्स ट्रीटमेंट से ‘सुंदरता’ बढ़ाने के आरोप

ऊंटों की सौंदर्य प्रतियोगिता से 20 ऊंट अयोग्य घोषित

20 camels disqualified from camel beauty contest

ओमान में आयोजित होने वाली ऊंटों की सौंदर्य प्रतियोगिताएं अक्सर चर्चा में रहती हैं, लेकिन इस बार एक अनोखे कारण से यह सौंदर्य प्रतियोगिता चर्चा में है। ओमान के अल मुसन्ना में आयोजित ‘कैमेल ब्यूटी शो फेस्टिवल’ में इस वर्ष 20 ऊंटों को प्रतियोगिता से अयोग्य घोषित कर दिया गया। इन ऊंटों पर आरोप है कि उन्होंने सुंदरता बढ़ाने के लिए बोटॉक्स और अन्य कृत्रिम उपचारों का इस्तेमाल किया था।

रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रतियोगिता में ‘ड्रोमेडरी’ नस्ल के ऊंट मुख्य आकर्षण होते हैं। ड्रोमेडरी ऊंटों की पहचान उनके एक कूबड़ और चार थनों से होती है, जबकि लामा प्रजाति में सामान्यतः दो थन होते हैं। प्रतियोगिता में जीतने वाले ऊंट के मालिकों को बड़ी धनराशि, महंगी कारें और अन्य पुरस्कार दिए जाते हैं। इसी वजह से कई मालिक अपने ऊंटों को प्रतियोगिता में आकर्षक दिखाने के लिए कृत्रिम उपायों का सहारा लेने लगे हैं।

बताया गया कि कुछ ऊंटों के होंठ, कूबड़ और शरीर के अन्य हिस्सों को अधिक उभरा हुआ दिखाने के लिए बोटॉक्स और फिलर्स का इस्तेमाल किया गया। ऊंटों की सुंदरता का मूल्यांकन करते समय उनके होंठों की बनावट, कूबड़ की समरूपता, गर्दन की लंबाई, चमकदार त्वचा, गहरी आंखें और पीले चमकदार दांत जैसे मानकों को देखा जाता है। ऐसे में कुछ प्रजनकों ने प्रतियोगिता में बढ़त पाने के लिए इन कृत्रिम तरीकों का उपयोग किया।

इस तरह के उपचारों को लोग सौंदर्य प्रतियोगिता में ‘डोपिंग’ के समान मानते हैं। कुछ संपन्न प्रजनक अपने ऊंटों को मांसपेशियां मजबूत करने के लिए विशेष उपचार भी देते हैं, जबकि कुछ मामलों में ऊंटों की नाक की सर्जरी तक कराई जाती है। वहीं जिन मालिकों के पास महंगे उपचार कराने के संसाधन नहीं होते, वे भी अजीब तरीकों का सहारा लेते हैं, जैसे हाथों से ऊंटों के निचले होंठ को खींचकर उसे अधिक बड़ा दिखाने की कोशिश करना।

पशु चिकित्सकों और पशु कल्याण संगठनों ने इन तरीकों को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे उपचारों से ऊंटों में संक्रमण, सूजन और दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा हार्मोन से जुड़ी गड़बड़ियां और व्यवहार में बदलाव भी देखने को मिल सकता है। मादा ऊंटों में अत्यधिक उपचार के कारण बांझपन तक की आशंका जताई जाती है।

इन विवादों को देखते हुए प्रतियोगिता आयोजकों ने भी निगरानी कड़ी कर दी है। कई आयोजनों में अब ऊंटों के रक्त नमूनों की जांच की जाती है और एक्स-रे जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी भी प्रकार का कृत्रिम सौंदर्य उपचार न किया गया हो।

यह भी पढ़ें:

प्रधानमंत्री 14 मार्च को बंगाल में छह पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे!

काशी विश्वनाथ मंदिर में ईंधन कमी नहीं, श्रद्धालुओं को मिलता प्रसाद लगातार!

इराक में ऊपर अमेरिकी वायुसेना का KC-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान दुर्घटनाग्रस्त

Exit mobile version