जल संसाधन विभाग के अनुसार, गंडक नदी डुमरिया घाट, कोसी नदी बलतारा और कुर्सेला, बूढ़ी गंडक खगड़िया, गंगा नदी दीघा, गांधी घाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसके अलावा पुनपुन नदी श्रीपालपुर, बागमती नदी बेनीबाद तथा घाघरा नदी दरौली और गंगपुर सिसवन में भी खतरे के निशान से ऊपर है।
आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए विभिन्न जिलों में 1,245 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक करीब 73.30 लाख थाली भोजन उपलब्ध कराया गया है। वहीं, 13 राहत शिविरों में 12,260 बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए आवासन, भोजन और चिकित्सा सहित अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
पशुपालकों की मदद के लिए अब तक 11,204 क्विंटल पशुचारा भी वितरित किया गया है। नदियों के जलस्राव की स्थिति पर भी विभाग लगातार नजर बनाए हुए है। शनिवार को सुबह 10 बजे वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक नदी का जलस्राव 75,500 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसकी प्रवृत्ति स्थिर रही। इसी तरह वीरपुर बराज पर कोसी नदी का जलस्राव 1,43,665 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसकी प्रवृत्ति स्थिर रही।
इस वर्ष 20 जुलाई को कोसी का अधिकतम जलस्राव 2,55,425 क्यूसेक दर्ज किया गया था। इंद्रपुरी बराज पर सोन नदी का जलस्राव 70,021 क्यूसेक रहा और इसमें कमी की प्रवृत्ति दर्ज की गई। सोन का इस वर्ष अधिकतम जलस्राव 2 सितंबर को 5,63,654 क्यूसेक दर्ज किया गया था।
इस बीच जल संसाधन विभाग ने जलस्तर में अचानक कमी यानी ‘सडन ड्रॉडाउन’ को लेकर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है। विभाग ने चेताया है कि जलस्तर तेजी से घटने पर नदी के किनारों पर अचानक और तेज कटाव का खतरा बढ़ सकता है। इससे संवेदनशील तटीय क्षेत्रों और तटबंधों पर जोखिम उत्पन्न हो सकता है। अधिकारियों को संवेदनशील तटों, कटाव-प्रवण स्थलों और पहले से कमजोर स्थानों की लगातार निगरानी तथा पेट्रोलिंग करने को कहा गया है।
अचानक कटाव, तट धंसने या नदी की धारा के तेजी से तट की ओर बढ़ने के संकेत मिलने पर तत्काल स्थल निरीक्षण कर सुरक्षात्मक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया है। विभाग ने कटाव की सूचना में किसी भी तरह की देरी नहीं करने और पर्याप्त संसाधन व सामग्री पहले से उपलब्ध रखने को कहा है। स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
