शरीर में प्रोटीन के बेहतर अवशोषण और उपयोग के लिए डॉक्टरों द्वारा सुझाए गए 7 टिप्स​!

प्रोटीन का अधिक सेवन व्यर्थ नहीं जाता। शरीर उसे अवशोषित कर लेता है, लेकिन एक निश्चित मात्रा के बाद उसका उपयोग अलग तरीके से करता है।

शरीर में प्रोटीन के बेहतर अवशोषण और उपयोग के लिए डॉक्टरों द्वारा सुझाए गए 7 टिप्स​!

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शरीर के लिए प्रोटीन का सेवन बेहद जरूरी है, लेकिन यदि उसका सही ढंग से अवशोषण (Absorption) और उपयोग (Utilisation) न हो तो उसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता। रोजमर्रा की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी साझा करने वाली डिजिटल क्रिएटर गुंजन तनेजा ने अपने इंस्टाग्राम पर प्रोटीन के बेहतर अवशोषण के लिए सात महत्वपूर्ण सुझाव बताए हैं।

प्रोटीन के बेहतर अवशोषण के लिए 7 टिप्स​-

​१-पूरे दिन में प्रोटीन का सेवन अलग-अलग समय पर करें।
​२-पर्याप्त मात्रा में विटामिन B6, मैग्नीशियम और कुल कैलोरी लें।
​३-अपनी आंत (गट) की सेहत को बेहतर बनाए रखें।
​४-नियमित व्यायाम करें, विशेष रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग।
​५-प्रोटीन के साथ कार्बोहाइड्रेट का भी सेवन करें।
​६-पौधों से मिलने वाले प्रोटीन के लिए सही तकनीक अपनाएं – जैसे अंकुरित करना, भिगोना और ​        किण्वन (फर्मेंटेशन)।
​७-अच्छी और पर्याप्त नींद लें ताकि पाचन सही रहे।

शरीर में प्रोटीन कैसे अवशोषित होता है?

नवी मुंबई स्थित Kokilaben Dhirubhai Ambani Hospital के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, हेपेटोलॉजी और लिवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. दीपक भांगले के अनुसार, लोग अक्सर प्रोटीन के अवशोषण को गलत समझते हैं। वास्तव में मुख्य मुद्दा प्रोटीन की “जैव उपलब्धता” (Bioavailability) का है।

उनका कहना है कि शरीर एक बार में भी प्रोटीन को अवशोषित कर सकता है। असली सवाल यह नहीं है कि प्रोटीन पचता है या नहीं, बल्कि यह है कि मांसपेशियों की वृद्धि के लिए वह कितनी प्रभावी मात्रा में उपयोग हो पाता है।

डॉ. भांगले बताते हैं कि आम धारणा के विपरीत, अधिक मात्रा में लिया गया प्रोटीन बर्बाद नहीं होता। वह शरीर में मांसपेशियों के निर्माण की प्रक्रिया को लंबे समय तक सक्रिय रख सकता है या फिर ऊतकों की मरम्मत और ऊर्जा उत्पादन में इस्तेमाल हो सकता है।

कितनी मात्रा में प्रोटीन लेना चाहिए?

शोध के अनुसार, प्रति भोजन लगभग 0.3–0.4 ग्राम प्रोटीन प्रति किलोग्राम शरीर के वजन के हिसाब से (अधिकांश वयस्कों के लिए लगभग 20–40 ग्राम) मांसपेशियों में प्रोटीन संश्लेषण को अधिकतम करने के लिए पर्याप्त माना जाता है।

इस मात्रा को दिनभर में 3–4 भोजन में बांटकर लेना चाहिए, ताकि कुल दैनिक सेवन लगभग 1.6 ग्राम प्रति किलोग्राम शरीर के वजन तक पहुंच सके।

प्रोटीन का बेहतर उपयोग कैसे करें?​ : डॉ. भांगले के अनुसार, उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन स्रोत जैसे:-

दूध और दुग्ध उत्पाद
अंडे
मछली
कम वसा वाला मांस
एक-दूसरे के पूरक पौध-आधारित प्रोटीन स्रोत

का सेवन करना चाहिए। साथ ही दिनभर में संतुलित रूप से प्रोटीन लेना, नियमित रेजिस्टेंस एक्सरसाइज करना, पर्याप्त नींद लेना और संतुलित भोजन करना प्रोटीन के सर्वोत्तम उपयोग का तरीका है।

अंकुरित दालें क्यों फायदेमंद हैं?​: चेन्नई के Sree Balaji Medical College and Hospital में पंजीकृत आहार विशेषज्ञ दीपलक्ष्मी के अनुसार, भीगी हुई और अंकुरित दालें प्रोटीन का अच्छा स्रोत हैं।

अंकुरण और भिगोने की प्रक्रिया दालों में मौजूद फाइटिक एसिड को कम करती है, जिससे आयरन, जिंक और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है। इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम होता है, इसलिए यह मधुमेह रोगियों के लिए भी एक अच्छा नाश्ता माना जाता है।

वे यह भी बताती हैं कि प्रोटीन को कार्बोहाइड्रेट और स्वस्थ वसा के साथ लेने से रक्त शर्करा का स्तर स्थिर रहता है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है।

किन गलतियों से बचना चाहिए?​: डॉ. भांगले के अनुसार निम्नलिखित गलतियों से बचना चाहिए:-

​१-​ दिनभर का अधिकांश प्रोटीन केवल रात के भोजन में लेना।
​२-​ केवल कम गुणवत्ता वाले पौध-आधारित प्रोटीन स्रोतों पर निर्भर रहना।
​३- बुजुर्गों में आवश्यक मात्रा से कम प्रोटीन लेना।
​४- स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या रेजिस्टेंस एक्सरसाइज को नजरअंदाज करना।

वे यह भी कहते हैं कि लंबे समय तक उपवास रखने वाले, पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे या किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित लोगों को प्रोटीन सेवन की व्यक्तिगत रणनीति अपनानी चाहिए।

प्रोटीन का केवल अधिक सेवन करना पर्याप्त नहीं है। उसे दिनभर में सही मात्रा में बांटना, संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, आंतों की सेहत बनाए रखना और पर्याप्त नींद लेना प्रोटीन के अधिकतम लाभ के लिए जरूरी है।

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