मॉलिक्यूलर क्लाउड गैस और धूल के बड़े-बड़े क्षेत्र होते हैं, जो हमारी मिल्की वे गैलेक्सी में फैले हुए हैं। इनमें गुरुत्वाकर्षण के कारण पदार्थ आपस में सिकुड़ता है और नए तारे जन्म लेते हैं। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का एसपीएचईआरईएक्स मिशन इन्हीं बादलों के अंदर मौजूद बर्फ का विस्तृत नक्शा तैयार कर रहा है।
नासा के अनुसार, इन बादलों में पानी, कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड के साथ बर्फ भी पाई जाती है। यह बर्फ धूल के छोटे कणों की सतह पर जमती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रह्मांड का ज्यादातर पानी इन्हीं बर्फीले भंडारों में बनता और जमा होता है। ये जीवन की उत्पत्ति की केमिस्ट्री के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
वहीं, तस्वीर में चमकीले नीले रंग में पानी की बर्फ दिखाई दे रही है। यह तस्वीर साइग्नस एक्स क्षेत्र की है, जो मिल्की वे गैलेक्सी में तारों के जन्म का सबसे सक्रिय और उथल-पुथल भरा इलाका है। यहां नारंगी और नीले रंग के महीन धागे जैसे निशान दिख रहे हैं।
मॉलिक्यूलर क्लाउड ब्रह्मांड की सबसे ठंडी जगहों में से एक हैं, जहां तापमान बेहद कम होता है। यहीं गैस के घने बादल सिकुड़कर तारों का रूप लेते हैं। नासा का यह मिशन इन बादलों की रासायनिक संरचना को बेहतर तरीके से समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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