शाजी के. व्ही. का सफर ग्रामीण भारत के विकास की एक छोटी कहानी है। उनका जन्म केरल के तिरुवनंतपुरम में हुआ था। उन्होंने कृषि क्षेत्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। इसके अलावा, उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद से पब्लिक पॉलिसी और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट (PGDM) भी किया है। इस शैक्षणिक पृष्ठभूमि के कारण उन्हें कृषि क्षेत्र की बारीकियों, समस्याओं और उनके आर्थिक व रणनीतिक समाधानों की गहरी समझ है।
2013 से 2017 तक, वह केरल ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष थे। उस समय, यह बैंक देश का सबसे बड़ा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक था। ग्रामीण बैंकों के महत्व को पहचानते हुए, उन्होंने इन बैंकों को और अधिक मजबूत बनाने का काम किया। 2020 में, वह नाबार्ड में उप-प्रबंध निदेशक के रूप में शामिल हुए और 7 दिसंबर 2022 को उन्होंने अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला।
उनके नेतृत्व में, नाबार्ड ने कई महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किए हैं। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि पारंपरिक कृषि वित्तपोषण को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। आज की दुनियां तकनीक पर आधारित है और कृषि भी इसका अपवाद नहीं है। शाजी के. व्ही. के नेतृत्व में, नाबार्ड ने ‘कृषि-फिनटेक’ की अवधारणा को बहुत महत्व दिया है।
उनके नेतृत्व में, नाबार्ड ने जलवायु परिवर्तन से संबंधित पहलों पर भी ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने जलवायु-आधारित फसल योजना, कृषि क्षेत्र में कार्बन क्रेडिट का निर्माण और हरित प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने जैसे कई अभियानों को प्रोत्साहित किया है।
शाजी के. व्ही. का काम सिर्फ एक बैंक के प्रबंधन तक सीमित नहीं है। वे ग्रामीण भारत की असली ताकत को जानते हैं। वे केवल आंकड़ों और नीतियों को नहीं देखते, बल्कि हर किसान के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का सपना देखते हैं।
मैं एक उद्यमी हूँ, लेकिन मेरा मूल परिवार किसान है। मैं भी किसान हूँ। आज भी डहाणू में हमारी खेती की जमीन है। इसलिए मैं शाजी के काम का महत्व और आवश्यकता समझ सकता हूँ। एक उद्यमी ही नहीं बल्कि एक किसान के तौर पर भी मुझे उनके काम से प्रेरणा मिलती है। किसी भी व्यवसाय या कार्यक्षेत्र को सफल बनाने के लिए, केवल आर्थिक लाभ ही नहीं, बल्कि समाज के सबसे निचले तबके तक पहुंचकर उनके जीवन में बदलाव लाना ही सच्ची सफलता है। यही शाजी के काम का सार है और यही उनकी विशिष्टता है।
नाबार्ड के माध्यम से किया गया उनका काम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श उदाहरण है। उनके नेतृत्व में भारतीय कृषि क्षेत्र तेजी से आधुनिकता और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।
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