भारत-यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर मंगलवार को हो सकती है घोषणा

भारत-यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर मंगलवार को हो सकती है घोषणा

An announcement regarding the free trade agreement between India and the European Union could be made on Tuesday.

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चल रही मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ताओं के मंगलवार (28 जनवरी) को निष्कर्ष पर पहुंचने की संभावना है। यदि इसकी औपचारिक घोषणा होती है, तो इससे यूरोपीय कारों और वाइन पर शुल्क में कमी तथा भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र और रसायन उत्पादों के लिए यूरोपीय बाजार में पहुंच का विस्तार होने का रास्ता खुलेगा। इस घटनाक्रम की जानकारी भारत और ईयू सरकार के सूत्रों ने दी है।

संभावित घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ होने वाली बैठक के बाद की जा सकती है। कोस्टा और वॉन डेर लेयेन 25 से 28 जनवरी के बीच भारत दौरे पर रहेंगे और इस दौरान भारत-ईयू शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे। एक भारतीय सरकारी सूत्र के अनुसार, यदि समझौते को अंतिम रूप देकर यूरोपीय संसद से मंजूरी मिल जाती है, जिसमें कम से कम एक वर्ष लग सकता है तो इससे वस्त्र और आभूषण जैसे भारतीय निर्यात को बड़ा लाभ मिलेगा।

भारत-ईयू एफटीए पर बातचीत 2022 में नौ साल के अंतराल के बाद दोबारा शुरू हुई थी और बीते वर्ष वैश्विक व्यापार तनावों के बीच इसमें तेजी आई। अगस्त में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय आयात पर शुल्क बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया था, जो दुनिया में सबसे ऊंचे स्तरों में शामिल है। इसी पृष्ठभूमि में भारत और ईयू दोनों वैकल्पिक बाजारों और साझेदारियों को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने प्रगति के संकेत देते हुए कहा कि यूरोपीय संघ समझौते के काफी करीब है, हालांकि कुछ मुद्दों पर अभी और काम बाकी है। यह संभावित समझौता ऐसे समय में आ रहा है, जब ईयू ने हाल ही में दक्षिण अमेरिकी ब्लॉक मर्कोसुर के साथ एक अहम समझौता किया है और पिछले साल इंडोनेशिया, मैक्सिको और स्विट्जरलैंड के साथ भी व्यापारिक करार किए थे। इसी अवधि में भारत ने ब्रिटेन, न्यूज़ीलैंड और ओमान के साथ भी समझौते अंतिम रूप दिए हैं।

दोनों पक्षों के बीच 2024-25 वित्त वर्ष (मार्च में समाप्त) में द्विपक्षीय व्यापार 136.5 अरब डॉलर रहा, जिससे 27 देशों वाला यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। हालांकि, बातचीत के दौरान कई संवेदनशील मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। एक ईयू सरकारी सूत्र ने कहा, “वार्ताकार अभी भी कई संवेदनशील मुद्दों पर मतभेद दूर करने की कोशिश कर रहे हैं, जिनमें ऑटो आयात पर शुल्क में तीव्र कटौती को लेकर भारत में हिचकिचाहट देखने मिल रही है।”

नई दिल्ली की प्रमुख चिंता गैर-शुल्क बाधाओं को लेकर है, जिनमें स्टील, एल्युमिनियम और सीमेंट जैसे उत्पादों पर लगाए गए नए कार्बन शुल्क शामिल हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इन पर रियायत की गुंजाइश सीमित है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, “यूरोपीय संघ में शुल्क-मुक्त पहुंच से अमेरिकी बाजार में होने वाले नुकसान की भरपाई भारतीय वस्त्र और आभूषण निर्यातकों को करने में मदद मिल सकती है,” हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि नियामकीय बाधाएं बनी रहेंगी। उन्होंने कहा, “भारत-ईयू एफटीए से वस्त्र, परिधान और चमड़ा उत्पादों पर शुल्क घटेंगे, जिससे भारतीय निर्यातक बांग्लादेश और वियतनाम के साथ अधिक समान शर्तों पर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।”

यूरोप सालाना करीब 125 अरब डॉलर के वस्त्र आयात करता है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी 5–6 प्रतिशत है, जबकि चीन की करीब 30 प्रतिशत। यह आंकड़ा मुक्त व्यापार समझौते से संभावित लाभ को रेखांकित करता है, खासकर तब जब अमेरिका में शुल्क बढ़ रहे हैं। निवेशक बैंक जेफरीज के अनुसार, संभावित समझौते से भारत के ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स और रसायन क्षेत्र प्रमुख लाभार्थी हो सकते हैं। हालांकि, कुछ संवेदनशील कृषि उत्पादों को वार्ता के दायरे से बाहर रखा गया है।

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