उत्तर प्रदेश में गंगा जल स्तर तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है राज्य के कई जिलों व प्रमुख शहरों में भी बाढ़ की स्थिति गंभीर होती दिखाई दे रही है| मणिकर्णिका की गलियों में चल रहीं नावें, अस्सी में सड़क तक पहुंचा बाढ़ खतरे का निशान 71.26 मीटर है। जबकि केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक गंगा का जलस्तर रात 12 बजे तक 71.31 मीटर हो गया। जलस्तर प्रति घंटे तीन सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रहा है।
वाराणसी में गंगा का जलस्तर रविवार को खतरे के निशान से 57 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। इससे बाढ़ का संकट और गहरा गया है। पहली बार नमो घाट को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। घाट पर बना आकर्षक नमस्ते संरचना अब पूरी तरह से डूबने की कगार पर है इसलिए पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही रोक दी गई है। इससे पहले नमो घाट पर बाढ़ का पानी इतना नहीं आया था।
वहीं, जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि शीतला घाट की सड़क पर पानी पहुंच गया है। अस्सी घाट की सड़कों पर जलभराव है। सामने घाट की सड़क पर बाढ़ का पानी आ गया है।
बाढ़ का पानी बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर से महज 800 मीटर दूर है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की सीढ़ियों की तरफ भी गंगा का पानी तेजी से बढ़ रहा है। शाम तक गंगा द्वार की 13 सीढ़ियां ही बची थीं। अगर जलस्तर बढ़ने का यही सिलसिला रहा तो सोमवार को गंगा द्वार की कुछ और सीढ़ियां डूब सकती हैं।
जिला प्रशासन के मुताबिक, वाराणसी के 44 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इस कारण 1410 परिवारों को घर छोड़ना पड़ा है। 6244 किसानों की 1721 एकड़ फसल डूब गई है। इसी तरह शहरी क्षेत्र के 24 मोहल्ले भी बाढ़ से प्रभावित हैं।
इन मोहल्लों में रहने वाले 6376 लोगों को घर छोड़ना पड़ा है। सड़कों पर पानी भर गया है। इससे आना-जाना बंद हो गया है। सबको बाढ़ राहत शिविर में जगह लेनी पड़ी है। गंगा जलस्तर दो सेंटी मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। पलट प्रवाह से वरुणा, नाद और गोमती नदी भी उफनाई हैं। इसका असर आबादी क्षेत्रों में दिख रहा है। काशी के 84 घाटों को डुबोने के बाद गंगा शहर की ओर बढ़ चुकी हैं।
हरिश्चंद्र घाट पर जलस्तर बढ़ने के बाद गलियों में शवदाह किया जा रहा है। शवदाह के लिए लोगों को 2 से 3 घंटे लग रहे हैं। हरिश्चंद्र घाट पर बाढ़ के पहले 20-25 शवों का दाह संस्कार होता था तो अब 5-8 शवों का दाह संस्कार हो रहा है।
दशाश्वमेध घाट पर शीतला मंदिर को पूरी तरह से डुबोने के बाद बाढ़ का पानी अब सब्जी मंडी की सड़क तक पहुंच चुका है। राजेंद्र प्रसाद घाट की तरफ से तीन सीढ़ियां अभी बाकी हैं। जल पुलिस चौकी अब पूरी तरह से डूब चुकी है। चौकी पर लगा बोर्ड ही अब नजर आ रहा है। क्षेत्र में सड़क पर पानी लगातार बढ़ रहा है जिससे लोग सड़कों पर ही स्नान कर रहे हैं।
शहर के प्रमुख घाटों में शामिल राजघाट की सभी सीढ़ियां डूब चुकी हैं। अब वहां केवल ऊपरी हिस्से पर ही खड़ा होना संभव है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि इसी गति से जलस्तर बढ़ता रहा तो राजघाट की सड़कों पर भी जल्द ही पानी आ जाएगा जिससे आवागमन प्रभावित होगा।
जिला प्रशासन ने बाढ़ राहत केंद्रों की तैयारियां तेज कर दी हैं। नाविकों को घाटों पर नाव संचालन से मना किया गया है। किसी भी तरह की जल गतिविधियों पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी गई है।
गंगा की इस रफ्तार से यह अंदेशा जताया जा रहा है कि आने वाले 24 से 48 घंटे में शहर के निचले हिस्सों में पानी घुस सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक सूचनाओं का पालन करें। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
गंगा का जलस्तर बढ़ने से वरुणा, नाद और गोमती नदी भी उफनाई हैं। गंगा के जलस्तर ने अगस्त 2022 के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है। अगस्त 2022 में जहां जलस्तर 71.54 मीटर रिकॉर्ड किया गया था वह अगस्त 2025 में 71.81 मीटर दर्ज किया गया। यह जलस्तर 27 सेंटी मीटर ज्यादा है। जलस्तर बढ़ने का सिलसिला अभी जारी है। इससे नदी विज्ञानी चिंतित हैं। उनका कहना है कि 1978 जैसी बाढ़ के हालात हैं।
नदी विज्ञानी प्रो. बीडी त्रिपाठी ने बताया कि गंगा के जलस्तर को नापने के लिए राजघाट और दशाश्वमेध घाट पर गेज मीटर लगाया गया है। 1978 में आई बाढ़ के बाद बाढ़ का उच्चतम बिंदु 73.90 मीटर निर्धारित किया गया था। खतरे का निशान 71.26 मीटर और चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर है।
चेतावनी बिंदु का अर्थ है कि अब सभी को बाढ़ के प्रति सतर्क रहना है और खुद को सुरक्षित स्थान पर ले जाना है। खतरे के निशान को पार करने का मतलब दिक्कत बढ़ती है। जिस हिसाब से जलस्तर बढ़ रहा है, उससे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
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