नरेंद्र मोदी ने शनिवार (21 फरवरी) को लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा का भारत में राज्य दौरे के दौरान जोरदार स्वागत किया, दोनों नेता ग्लोबल साउथ के साझा हितों और वैश्विक राजनीति में इसके बढ़ते प्रभाव पर केंद्रित बातचीत कर रहे हैं। ब्राज़ील के राष्ट्रपति भारत के एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भाग लेने और द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने के लिये आये हैं।
लूला दा सिल्वा का यह भारत का दूसरा बड़ा दौरा है, और इसके दौरान वे प्रधानमंत्री मोदी के साथ उच्चस्तरीय वार्ता करेंगे। वे भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति C P राधा कृशन और विदेश मंत्री S. जयशंकर से भी मुलाक़ात करेंगे।
दोनों नेताओं ने पिछले कुछ महीनों में गहरी बातचीत और सहयोग की झलक दी है। लूला ने पिछले महीने मोदी को फोन कर वेनेज़ुएला की स्थिति पर चर्चा की थी, जब वहाँ के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका द्वारा गिरफ्तार किया गया। इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक संवाद की स्पष्ट झलक मिली। ब्राज़ील के उच्चायुक्त ने भी कहा है कि मोदी और लूला केवल सहयोगी नहीं बल्कि बढ़ते भरोसेमंद मित्र भी बन गये हैं, जो वैश्विक दक्षिण के साझा एजेंडे पर काम कर रहे हैं।
दोनों मुल्क बिलाटेरल ट्रेड, रक्षा, ऊर्जा, डिजिटल टेक्नोलॉजी और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग को बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। वर्तमान में भारत-ब्राज़ील का व्यापार लगभग 15 से 16 अरब डॉलर चलता है, और दोनों देश इसे 2030 तक 20 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रख चुके हैं।
वहीं, रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में भी बातचीत ज़ोर पकड़ी है, जिसमें विमानन और फार्मा के समझौतों पर दस्तख़त होने की संभावना है। उद्योग जगत से जुड़े समझौते, जैसे कि एविएशन, एथेनॉल उत्पादन और टेक्नोलॉजी साझेदारी, भी दौरे के दौरान सोलह जा सकते हैं।
वैश्विक स्तर पर दोनों देश ब्रिक्स, IBSA, G20, UN और अन्य बहुपक्षीय मंचों में मिलकर काम कर रहे हैं, खासकर उन मुद्दों पर जो विकासशील देशों की आवाज़ को मजबूत बनाते हैं। वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार और अधिक प्रतिनिधि वैश्विक शासन संरचना की भी वकालत कर रहे हैं।
भारत और ब्राज़ील दोनों ग्लोबल साउथ के नए नेतृत्व केंद्र के रूप में खुद को स्थापित करना चाहते हैं, खासकर पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं और चीन–रूस के बीच बढ़ते विभाजन के समय। लूला की यह यात्रा इसी दृष्टिकोण के तहत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राजनीति से परे दोनों देशों के बीच आपसी आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक सहयोग की संभावनाएँ भी बढ़ रही हैं। भारत और ब्राज़ील के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी की यह यात्रा एक नई व आधुनिक साझेदारी की दिशा में कदम है, जो न केवल द्विपक्षीय फायदे बल्कि ग्लोबल साउथ के साझा हितों के लिये भी अहम है।
यह भी पढ़ें:
एक पल का गुस्सा बिगाड़ सकता है सेहत, आयुर्वेद से जानें क्रोध प्रबंधन के आसान उपाय
धर्मांतरण रोकने के लिए शुरू किये गए विद्यालय को आप के सहयोग की जरूरत
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्थिति अभी स्पष्ट नहीं; भारतीय वस्तुओं पर 10% या 18% टैरिफ?



