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खामेनेई की मौत के बाद क्या ईरान लौट सकते हैं आखरी शाह के पुत्र?

रज़ा पहलवी ने खुद को बताया ‘संक्रमणकालीन नेता'

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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की इजरायली और अमेरिकी हमलें में मौत के बाद देश में राजनीतिक अनिश्चितता गहरा गई है। करीब 37 वर्षों तक सत्ता में रहे खामेनेई की मौत ने इस्लामिक रिपब्लिक का भविष्य अंधेरे में धकेल दिया है। इसी बीच ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।

65 वर्षीय पहलवी ने खामेनेई की मौत का स्वागत करते हुए इसे इस्लामिक रिपब्लिक के अंत की शुरुआत बताया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “ख़ामेनेई मौत के साथ इस्लामिक रिपब्लिक प्रभावी रूप से समाप्त हो गई है और जल्द ही इतिहास के कूड़ेदान में चली जाएगी।” उन्होंने सुरक्षा बलों से अपील की कि, वह ढहते हुए शासन को सहारा देने की कोशिश न करें और सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण में शामिल हों।

रज़ा पहलवी ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के पुत्र हैं। 1979 की इस्लामी दंगो और हमलों के बाद राजशाही का अंत किया गया और इस्लामी उलेमाओं के नेतृत्व के तहत इस्लामिक रिपब्लिक की स्थापना हुई। उस समय 17 वर्षीय पहलवी अमेरिका के एक सैन्य स्कूल में थे और तब से वह चार दशकों से अधिक समय से अमेरिका में निर्वासन का जीवन जी रहे हैं।

उन्होंने खुद को लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ईरान का समर्थक बताया है। उनका कहना है कि यदि मौजूदा शासन गिरता है तो वह केवल संक्रमणकालीन भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं, न कि पूर्ण राजशाही की बहाली के लिए। हाल के वर्षों में उन्होंने यूरोपीय संसद, म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन और इज़राइल जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर ईरानी लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व किया है।

ईरान में पिछले वर्षों में हुए सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान कई प्रदर्शनकारियों ने पहलवी के समर्थन में नारे लगाए थे। उन्होंने द वॉशिंगटन पोस्ट में लिखा, “प्रदर्शनकारी मेरे नाम के साथ आज़ादी और राष्ट्रीय एकता के नारे लगा रहे हैं। मैं इसे सत्ता हथियाने का निमंत्रण नहीं, बल्कि एक गहरी जिम्मेदारी के रूप में देखता हूं।”

हाल ही में उन्होंने ‘ईरान प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट’ के तहत एक “इमरजेंसी पीरियड बुकलेट” जारी की, जिसमें शासन के पतन के बाद पहले छह महीनों की रणनीति, संभावित संकटों और समाधान का खाका पेश किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसे विशेषज्ञों की भागीदारी से तैयार किया गया।

हालांकि पहलवी कुछ प्रवासी ईरानियों, संवैधानिक राजतंत्रवादियों और उदार लोकतंत्र समर्थकों के बीच लोकप्रिय हैं, लेकिन देश के भीतर विपक्ष बिखरा हुआ है। विभिन्न वैचारिक गुटों के बीच स्पष्ट एकजुटता का अभाव है। सर्वेक्षणों के अनुसार, लगभग एक-तिहाई ईरानी उनका समर्थन करते हैं, जबकि लगभग उतने ही लोग उनका कड़ा विरोध भी करते हैं।

उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कदमों का समर्थन किया है और ईरान में बदलाव के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की वकालत की है। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा बहादुर ईरानी जनता से किया गया वादा अब पूरा हुआ है… यह एक मानवीय हस्तक्षेप है, जिसका लक्ष्य इस्लामिक रिपब्लिक की दमनकारी मशीनरी है, न कि ईरान का राष्ट्र।” हालांकि ट्रंप ने पहले उनके नेतृत्व को लेकर संशय जताया था। उन्होंने कहा था, “वह बहुत अच्छे लगते हैं, लेकिन मुझे नहीं पता कि उनके देश में उनका नेतृत्व स्वीकार किया जाएगा या नहीं।”

पहलवी ने बार-बार कहा है कि यदि जनता चाहती है तो वह संक्रमणकालीन सरकार का नेतृत्व करने को तैयार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि नया संविधान जनमत-संग्रह के जरिए तैयार होगा और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में स्वतंत्र चुनाव कराए जाएंगे। चुनाव के बाद संक्रमणकालीन सरकार स्वतः भंग हो जाएगी।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि खामेनेई की मौत के बाद ईरान की राजनीतिक दिशा क्या होगी। लेकिन इतना तय है कि इस घटनाक्रम ने रज़ा पहलवी को एक बार फिर संभावित राजनीतिक विकल्प के रूप में अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।

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