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Tuesday, March 31, 2026
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कनाडा में खालिस्तानी प्रतीकों पर लगाम कसना शुरू; सार्वजनिक प्रदर्शन अब दंडनीय

‘कॉम्बैटिंग हेट एक्ट’ पास

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कनाडा की संसद ने चरमपंथी गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘कॉम्बेटिंग हेट एक्ट’ (बिल C-9) अर्थात घृणा निवारण अधिनियम पारित कर दिया है। इस कानून के तहत अब आतंकवादी संगठनों से जुड़े प्रतीकों का सार्वजनिक प्रदर्शन, यदि वह नफरत फैलाने या धार्मिक स्थलों तक पहुंच बाधित करने के उद्देश्य से किया गया हो, तो दंडनीय अपराध माना जाएगा। 186-137 मतों से पारित इस विधेयक को खास तौर पर खालिस्तानी चरमपंथ से जुड़े प्रतीकों लगान कसने के रूप में देखा जा रहा है।

इन संगठनों के प्रतीक निशाने पर

कानून में प्रतीकों का इस्तेमाल नफरत भड़काने के लिए किया जाए तो उनपर रोक लगाने का प्रावधान है। बब्बर खालसा इंटरनेशनल और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन जैसे प्रतिबंधित संगठनों के झंडे और प्रतीकों के सार्वजनिक प्रदर्शन पर रोक लगाने का प्रावधान है। यह कनाडा के कानून में पहली बार है जब आतंकवादी प्रतीकों के महिमामंडन पर सीधे कार्रवाई की व्यवस्था की गई है।

इस कानून में घृणा से प्रेरित अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान भी किया गया है और पूजा स्थलों, स्कूलों या अन्य धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों तक पहुंच चाहने वाले लोगों को डराने-धमकाने या बाधा डालने के लिए नए अपराधों का निर्माण किया गया है।

धार्मिक स्थलों के आसपास ‘नो-प्रोटेस्ट ज़ोन’

इस कानून के तहत पूजा स्थलों, सांस्कृतिक केंद्रों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास ‘प्रोटेस्ट-फ्री ज़ोन’ बनाए जाएंगे, ताकि किसी भी समुदाय को डर या दबाव का सामना न करना पड़े। इंडो-कनाडियन, हिंदू और यहूदी समुदायों ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अतीत में ऐसे कई मामले सामने आए, जहां सार्वजनिक आयोजनों में हिंसा और हत्या का महिमामंडन किया गया।

धार्मिक प्रतीकों और नफरत के प्रतीकों में अंतर

कानून की एक अहम विशेषता यह है कि इसमें धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को स्पष्ट रूप से अलग किया गया है। ‘स्वस्तिक’ शब्द की जगह ‘नाजी हाकेनक्रॉइज’ (Nazi Hakenkreuz) का उपयोग किया गया है, ताकि हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मों के पवित्र प्रतीक को नाजी प्रतीकों से अलग रखा जा सके। इस बदलाव को सांस्कृतिक संवेदनशीलता के रूप में सराहा गया है।

कनाडा सरकार का कहना है कि यह कानून विचारों को नहीं, बल्कि नफरत फैलाने वाले कृत्यों को निशाना बनाता है। अभियोजन के लिए यह साबित करना जरूरी होगा कि आरोपी का उद्देश्य जानबूझकर नफरत फैलाना था। निजी उपयोग, ऐतिहासिक प्रदर्शन और धार्मिक प्रथाएं इस कानून के दायरे से बाहर रहेंगी।

आतंकी निज्जर की कनाडा में गैंगवार के दौरान हुई हत्या में जस्टीन ट्रुडो द्वारा भारत को जिम्मेदार ठहराने के कारण दोनों देशों के रिश्ते पूरी तरह से पटरी से उतर गए थे। वहीं नए कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित करने में सफल रहें है। वहीं भारत लंबे समय से कनाडा पर खालिस्तानी गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का दबाव बना रहा था। ऐसे में इस कानून को दोनों देशों के संबंधों में सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

अब यह विधेयक सीनेट में जाएगा, जहां उस पर आगे चर्चा और संशोधन हो सकते हैं। अगर यह अंतिम रूप से कानून बनता है, तो कनाडा में हेट क्राइम और आतंकवाद से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई का नया अध्याय शुरू हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून बहुसांस्कृतिक समाजों के लिए एक संतुलित मॉडल बन सकता है, जो सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता है।

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