योग केवल शरीर को मोड़ने, कठिन आसन करने या कुछ देर आंखें बंद करके बैठने का नाम नहीं है, बल्कि यह स्वयं को समझने और संतुलित जीवन जीने की एक कला है। योग का वास्तविक लाभ तभी मिलता है, जब इसका अभ्यास व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता के अनुसार किया जाए।
हर व्यक्ति का शरीर, मन और जीवनशैली अलग होती है। ऐसे में सभी के लिए एक जैसा योगाभ्यास करना उचित नहीं है। गलत तरीके से किया गया योग स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाने के बजाय नुकसान भी पहुंचा सकता है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी योगाभ्यास में व्यक्तिगत स्थिति और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों को ध्यान में रखने पर जोर दिया है। मंत्रालय के अनुसार, उम्र, स्वास्थ्य, शारीरिक एवं मानसिक अवस्था और मौसम जैसे कई कारक तय करते हैं कि किसी व्यक्ति के लिए कौन-सा योगाभ्यास उपयुक्त है। इसलिए योग शुरू करने से पहले अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जानकारी योग प्रशिक्षक या थेरेपिस्ट को देना जरूरी है। उनके मार्गदर्शन के अनुसार ही आसन और प्राणायाम करना चाहिए।
बुजुर्गों को योगाभ्यास में विशेष सावधानी की जरूरत
बढ़ती उम्र के साथ शरीर की क्षमता, लचीलापन और जरूरतें बदलने लगती हैं। ऐसे में बुजुर्गों को बहुत अधिक आगे या पीछे झुकने वाले आसनों और लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रहने वाले अभ्यासों से बचना चाहिए। पादहस्तासन और चक्रासन जैसे आसनों में शरीर को काफी आगे या पीछे की ओर झुकाना पड़ता है। बुजुर्गों के लिए ये आसन कठिन हो सकते हैं। इसलिए इन्हें प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह के बाद ही करना चाहिए।
हर प्राणायाम सभी के लिए सुरक्षित नहीं
योग और प्राणायाम करते समय व्यक्ति की शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य स्थिति सबसे अधिक मायने रखती है। प्रत्येक अभ्यास के कुछ निषेध भी होते हैं, यानी ऐसी परिस्थितियां जिनमें संबंधित आसन या प्राणायाम नहीं करना चाहिए। इन सावधानियों की जानकारी के बिना अभ्यास करना नुकसानदेह हो सकता है।
उदाहरण के तौर पर भस्त्रिका प्राणायाम में तेजी से और बलपूर्वक सांस अंदर ली और बाहर छोड़ी जाती है। इस अभ्यास के दौरान सांस लेने की गति और शारीरिक सक्रियता बढ़ती है। उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए यह अभ्यास जोखिम भरा हो सकता है। इससे रक्तचाप और हृदय गति प्रभावित हो सकती है। ऐसे लोगों को चिकित्सकीय सलाह के बिना भस्त्रिका नहीं करनी चाहिए।
योगाभ्यास के नियमों का रखें ध्यान
योग का अभ्यास हमेशा सही जानकारी, जागरूकता और उचित मार्गदर्शन के साथ करना चाहिए। अभ्यास शुरू करने से पहले शरीर की क्षमता और सीमाओं को समझना जरूरी है। सामान्यतः योग खाली पेट या भोजन करने के कम से कम तीन से चार घंटे बाद करना बेहतर माना जाता है। सुबह का समय योगाभ्यास के लिए सुविधाजनक हो सकता है।
महिलाओं को मासिक धर्म और गर्भावस्था के दौरान कुछ विशेष आसनों से बचने की जरूरत होती है। इसी तरह हर्निया से पीड़ित लोगों को कुछ ऐसे आसनों से परहेज करना चाहिए, जिनमें पेट पर दबाव पड़ता है या शरीर को पीछे की ओर अधिक झुकाना पड़ता है। हालांकि, सही अभ्यास व्यक्ति की बीमारी और उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है।
इसलिए योग को केवल शारीरिक व्यायाम समझकर कठिन आसनों की नकल नहीं करनी चाहिए। अपनी मेडिकल कंडीशन के अनुसार जरूरी सावधानियों का पालन करें और किसी भी नए आसन या प्राणायाम को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें। सही तरीके और नियमितता के साथ किया गया योग ही स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का आधार बन सकता है।
