इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक इंटरव्यू में ऐसा बयान दिया है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और गहराने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी न्यूज़ चैनल एबीसी न्यूज को दिए गए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा, “अगर ईरान के सर्वोच्च शासक अयातुल्ला अली खामेनी को खत्म कर दिया जाए, तो ही यह संघर्ष समाप्त हो जाएगा।”
यह बयान ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि इज़रायल के पास खामेनी को निशाना बनाने की योजना है। ट्रंप के इस बयान के बाद मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ने की चिंता जताई गई थी।
जब नेतन्याहू से इस योजना के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इससे इनकार नहीं किया। उल्टे उन्होंने कहा, “इससे संघर्ष बढ़ेगा नहीं, बल्कि खत्म होगा।” उन्होंने ईरान को “क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने वाला देश” बताया और कहा कि “पिछले कई दशकों से यह शासन हिंसा और आतंकवाद फैला रहा है।”
नेतन्याहू ने कहा कि “ईरान ने सऊदी अरब के अरामको तेल संयंत्र पर हमले किए, सीरिया और लेबनान में आतंकी संगठनों को समर्थन दिया और इस क्षेत्र को अस्थिर करने का काम किया है।” उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी दुनिया के लिए खतरा बताते हुए कहा कि “हम सिर्फ अपने दुश्मनों से नहीं लड़ रहे हैं, हम तुम्हारे दुश्मनों से भी लड़ रहे हैं।”
उन्होंने ये भी स्वीकार किया कि इज़रायल ने ईरान के वैज्ञानिकों और परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि ईरान के मिसाइल और न्यूक्लियर कार्यक्रम न सिर्फ इज़रायल, बल्कि अरब देशों, यूरोप और अमेरिका के लिए भी खतरा हैं।
अमेरिका के सहयोग के लिए नेतन्याहू ने आभार जताया और ट्रंप की भूमिका की सराहना करते हुए कहा, “कभी-कभी बुराई के खिलाफ खड़ा होना पड़ता है, और अमेरिका के लोग इसे समझते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप भी इसे समझते हैं। हमें यह सब होने नहीं देना चाहिए।”
इज़रायल के इस बयान के बाद ईरान की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इस बयान से पश्चिम एशिया में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
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