वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को 3 प्रतिशत से अधिक की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसका प्रमुख कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की समयसीमा को लेकर दी गई चेतावनी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 111.63 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 3 प्रतिशत से अधिक उछलकर 116.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह वृद्धि उस समय आई है जब वैश्विक आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत संभालता है और अब ईरान की मजबूत जकड़ में होने के कारण तेल की ढुलाई बाधित हुई है। इस कारण तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। फरवरी 27 को 72.48 डॉलर पर ट्रेड कर रहा ब्रेंट क्रूड मार्च की शुरुआत में 119.50 डॉलर तक पहुंच चुका था, जो इस पूरे संकट की गंभीरता को दर्शाता है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तय समयसीमा तक जलडमरूमध्य नहीं खोला गया तो “भयंकर परिणाम” भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो ईरान के बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया जा सकता है। दूसरी ओर, ईरान ने कथित तौर पर संघर्षविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।
इस भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा है। भारत में शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई, जहां सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 1 प्रतिशत तक की कमजोरी देखी गई। वहीं, अमेरिकी शेयर बाजार वॉल स्ट्रीट हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एशियाई बाजारों में मिश्रित रुख देखने को मिला।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान लंबे समय तक जारी रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और खासकर आयात पर निर्भर देशों पर दबाव बढ़ेगा। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संबंधों की दिशा और हॉर्मुज क्षेत्र की स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए निर्णायक साबित होगी।
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