29 C
Mumbai
Friday, March 13, 2026
होमदेश दुनियाचैत्र नवरात्रि में यहां तीन प्रहर मां के तीन शक्ति रूपों की...

चैत्र नवरात्रि में यहां तीन प्रहर मां के तीन शक्ति रूपों की पूजा होती!

केरल के एर्नाकुलम जिले में कोच्चि के पास लगभग 100 साल पुराना मंदिर चोट्टानिक्करा भगवती मंदिर है, जहां आज भी मां के चमत्कारों की गूंज सुनाई देती है।

Google News Follow

Related

उत्तर भारत में चैत्र के महीने में देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ बढ़ने लगती है, क्योंकि नौ दिन मां के नौ रूपों की आराधना की जाती है। चैत्र नवरात्रि में मां भगवती के शक्तिपीठ और सिद्धपीठ मंदिरों में अलग ही रौनक देखने को मिलती है। वैसे ही दक्षिण भारत में कई मंदिर मौजूद हैं, जहां चैत्र नवरात्रि में मां की विशेष आराधना की जाती है। ऐसा ही एक मंदिर है चोट्टानिक्करा मंदिर, जहां माता रानी की एक नहीं, बल्कि तीन अलग रूपों में पूजा की जाती है।

केरल के एर्नाकुलम जिले में कोच्चि के पास लगभग 100 साल पुराना मंदिर चोट्टानिक्करा भगवती मंदिर है, जहां आज भी मां के चमत्कारों की गूंज सुनाई देती है। चोट्टानिक्करा भगवती को चर्म रोग की देवी माना जाता है, जो भक्तों को चर्म रोग से निदान दिलाने का आशीर्वाद देती है। मंदिर की खास बात है मंदिर की पूजा विधि। मंदिर में मां के दिन रूपों की पूजा की जाती है, जो हर प्रहर के बाद बदल जाती है।

सुबह मां को सरस्वती के रूप में पूजा जाता है और श्वेत पोशाक पहनाई जाती है, जबकि दोपहर में मां लक्ष्मी के रूप में पूजा होती है और मां को लाल साड़ी अर्पित की जाती है और शाम के वक्त मां को नीली वस्त्र पहनाकर भद्रकाली के रूप में पूजा जाता है। तीनों समय की पूजा और अनुष्ठान अलग-अलग तरीकों से किया जाता है।

चैत्र माह में मंदिर में मकम थोजल की रस्म निभाई जाती है, जो मार्च के महीने में होता है। इस उत्सव में मकम नक्षत्र में माता के विशेष दर्शन किए जाते हैं और मुहूर्त में दर्शन के लिए भक्त अलग-अलग राज्यों से आते हैं। चोट्टानिक्करा भगवति मंदिर को लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रसिद्ध हैं। मां चर्म रोग से मुक्ति के अलावा मानसिक रोगों से मुक्ति और तंत्र विद्या का काठ भी करती है।

भूत-प्रेतों से मुक्ति के लिए मंदिर में गुरुथी पूजा नाम का अनुष्ठान भी होता है, जिसमें 12 बर्तनों में मां को मीठा पानी अर्पित करने की रस्म निभाई जाती है। मंदिर की वास्तुकला की बात करें तो मंदिर लकड़ी और पत्थर से बना है।

मंदिर का डिजाइन बौद्ध धर्म से प्रेरित लगता है, जिसमें गुबंद नहीं, बल्कि मंदिर के शिखर पर नुकीली चोटी है। मंदिर के प्रांगण में एक चमत्कारी पेड़ भी है, जहां मन्नत का धागा बांधकर भक्त अपनी मनोकामना पूरी करते हैं।

​यह भी पढ़ें-

नए राज्यपाल को ममता का संदेश: बंगाल उनसे प्यार करता जो बंगाल से प्यार करें​!

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,043फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
298,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें