ईडी ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज तीन एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की है। इन एफआईआर में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप हैं। मौलाना शमसुल हुदा खान मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले हैं। वे 1984 में एक सरकारी मान्यता प्राप्त मदरसे में प्राइमरी स्कूल टीचर के रूप में नियुक्त हुए थे।
ईडी के अनुसार, आरोपी ने विदेशी नागरिकता छिपाई, गलत राष्ट्रीयता बताई और गैर-कानूनी तरीके से अचल संपत्तियां हासिल कीं। साथ ही, सरकारी सैलरी और पेंशन बिना हक के ली गई। जांच में पता चला कि उनके कंट्रोल वाले एनजीओ के जरिए डोनेशन की आड़ में गैर-कानूनी फंड भेजे गए, जिन्हें मदरसे बनाने और संपत्तियां खरीदने में इस्तेमाल किया गया। फाइनेंशियल एनालिसिस से 10 लाख रुपए से ज्यादा की रकम मदरसे और प्रॉपर्टी में लगी मिली।
मौलाना शमसुल हुदा खान और उनके कंट्रोल वाली कंपनियों/एनजीओ के बैंक अकाउंट्स में 5 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि मिली है।
सर्च के दौरान 17 अचल संपत्तियों से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त किए गए। इन संपत्तियों की घोषित खरीद कीमत करीब 3 करोड़ रुपए है, लेकिन बाजार मूल्य अनुमानित 20 करोड़ रुपए से ज्यादा है। कुछ रिपोर्ट्स में कुल संपत्तियों का मूल्य 33 करोड़ तक बताया गया है। जब्त दस्तावेजों की जांच से क्राइम से हुई कमाई का पता लगाया जा रहा है।
ईडी की जांच में विदेशी फंडिंग, एनजीओ के दुरुपयोग और धोखाधड़ी के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग का संदेह है। आगे की जांच जारी है, जिसमें बैंक रिकॉर्ड, विदेशी ट्रांसफर और संपत्तियों के स्रोत की गहराई से पड़ताल होगी।
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